Tuesday, April 20, 2021
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8 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया, फिर भी अपराजिता बनीं सिक्किम की पहली IPS आफिसर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

अपराजिता जब महज 8 वर्ष की थी, तब उनके पिता का निधन हो गया था। पिता फॉरेस्ट आफिसर थे और मां टीचर। एक सभ्य परिवार में रहते हुए भी अपराजिता को पिता के निधन के बाद अपनी मां का बेटा बनकर रहना पड़ा था। अपराजिता पढ़ाई में अव्वल थीं और जीवन में कुछ बड़ा करना चाहती थी। पिता के जाने के बाद मां ने अपने कंधों पर ही घर की सारी जिम्मेदारी ले ली। इस छोटी सी उम्र में जिस बच्ची को पिता के प्यार की जरूरत होती है, उस उम्र में अपराजिता अपनी मां के साथ घर की जिम्मेदारियों का बोझ संभालने में सहयोग कर रही थी।

सरकारी दफ्तर जाकर बदल गया निर्णय

मां का हाथ बंटाने के लिए अपराजिता को कई बार सरकारी दफ्तरों में भी जाना पड़ता था। तब वहां का ढर्रा देखकर दोनों मां-बेटी परेशान हो जाया करती थी। उन्हें अपने काम के लिए बार बार इन दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। यह देखकर ही अपराजिता ने बड़ा अफसर बनने का फैसला कर लिया। उन्होंने सोच लिया था कि बड़ा सरकारी अफसर बनकर वह लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगी।

स्टेट लेवल पर टॉप किया अपराजिता ने

अपराजिता ने छोटी सी उम्र में ही मेहनत करना सीख लिया था। शुरू से ही होशियार प्रवृति की अपराजिता पढ़ाई में इतनी अव्वल थीं कि उन्होंने स्टेट लेवल पर टॉप कर अपने आपको साबित करके दिखाया था। आईएससी की परीक्षा में उन्होंने 95 प्रतिशत अंक लाकर शानदार प्रदर्शन किया था। कई बार बड़े पुरस्कारों से भी उन्हें सम्मानित किया गया था। फिर उनका रूझान बीए एलएलबी की ओर हो गया। इसे पास करने के बाद न्यायशास्त्र और लोक प्रशासन में राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साईंस कोलकत्ता से स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

इस तरह से दी यूपीएससी की परीक्षा

इसके बाद अपराजिता ने कई बड़े पुरस्कारों को अपने नाम किया। इतनी कामयाबी के बाद उन्होंने यूपीएससी की ओर अपना ध्यान देना आरंभ किया और 2010 में यूपीएससी की परीक्षा दी। पहले ही प्रयास में अपराजिता ने सफलता तो हासिल कर ली। मगर इसमें उन्हें 768 रैंक हासिल हुई, जिसे वह संतोषजनक नहीं मानती थी। इसके बाद उन्होंने अगले वर्ष यानि कि 2011 में फिर से परीक्षा दी, इस बार सुधार के साथ उनकी रैंक 358 पर आ गई और उन्हें आईपीएस रैंक हासिल हुई।

28 साल की उम्र में बनीं आईपीएस आफिसर

28 साल की उम्र में ही अपराजिता को आईपीएस रैंक मिला और वह सिक्किम प्रदेश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं। बता दें कि सिक्किम प्रदेश में यूपीएससी परीक्षा देने वाले कैंडिडेटस के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है, जिससे वह इस परीक्षा को पास कर सकें। इसके बारे में युवाओं को बहुत कम जानकारी थी। हालांकि इंटरनेट के दौर में अब बदलाव आया है, मगर जब अपराजिता ने इस फील्ड में कदम रखा था, तब उन्होंने कड़ा संघर्ष किया,जिसके बाद वह प्रदेश की पहली आईपीएस अधिकारी बनने में सफल रही थीं।

पिता का था ये सपना

अपराजिता के पिता उन्हें एक कारपोरेट वकील के तौर पर स्थापित होते देखना चाहते थे, मगर अपराजिता ने सरकारी दफ्तरों का बेहाल रवैया देखने के बाद ही देश सेवा में जाने का निर्णय लिया था। इसलिए उन्होंने इस कठिन परीक्षा को चुना और वह भी ऐसे समय में जब सिक्किम जैसे प्रदेश में लोग उससे अंजान ही थे। मगर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपना निर्णय नहीं बदला। यही वजह रही कि वह अपनी मंजिल पर पहुंचने में सफल रही।

 

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