Thursday, January 21, 2021
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फ्री में केक बांटकर बेटियों के चहरे पर मुस्कान ला रहे हैं यह शख्स, सालाना 7 हजार किलो केक बांटते हैं

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New Delhi: बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के बारे में तो आपने सुना ही होगा। इस अभियान की शुरुआत केंद्र की मोदी सरकार ने अपनी पहली सरकार के दौरान की थी। इस अभियान का एकमात्र मकसद है कि बेटियो को गर्भ में मारने की बजाय उन्हें भी जीने का बराबर हक दिया जाए, साथ ही पढ़ाया जाए। जिससे वह समाज में सुधार ला सके। बहरहाल, आज इसी विषय पर एक स्टोरी लेकर आए हैं। यह स्टोरी एक ऐसे शख्स की है जो बेटी बचाओ बेची पढ़ाओ अभियान से इतना प्रेरिता हुआ कि उसने गरीब बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए वह अपनी बेकरी की दुकान से फ्री में केक बांट रहे हैं। यह शख्स पांच साल तक की बच्चियों को फ्री में केक देते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में

फ्री में केक बांटने वाले शख्स सूरत के रहने वाले हैं
पांच साल की बच्चियों को उनके जन्मदिन पर फ्री में केक बांटने वाले शख्स सूरत के रहने वाले हैं। इनका नाम संजय चोड़वडिया है। वह गरीब तबके की बच्चियों को उनके जन्मदिन पर केक देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का काम कर रहे हैं।

12 साल से चल रहा है अभियान
संजय बताते हैं कि वह पिछले 12 साल से केक बांटने के अभियान को चला रहे हैं। वह बताते हैं कि वह सालाना 7 लाख रुपये की कीमत के सात हजार से ज्यादा केक बांट चुके हैं।

सातवीं तक ही पढ़े हैं संजय
संजय बताते हैं कि वह मूल रूप से अमरेली जिले के सावरकुंडला शहर के रहने वाले हैं। वह बताते हैं कि वह पिछले 20 साल से सूरत में रह रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह सिर्फ सातवीं क्लास तक ही पढ़ाई कर सके। वह बताते हैं कि इसके बाद वह रोजगार की तलाश में अपने गांव से सूरत आए थे। यहां उन्होंने 8 साल तक डायमंड फैक्ट्री में काम किया। इसके बाद कई और कंपनी में काम किया। फिर इन्हीं दिनों उन्हें ख्याल आया कि खुद का काम किया जाए। जिसे देखथे हुए उन्होंने खुद की बेकरी खोलने का निर्णय लिया। वह डभोली इलाके के घनश्याम बेकरी के नाम से दुकान चला रहे हैं, जिसके अब कुल 14 ब्रांच भी हैं।

फ्री में केक बांटने पर क्या कहते हैं संजय
संजय बताते हैं कि एक दिन उन्होंने कथावाचक मोरारी बापू के प्रवचन सुने। इस दौरान वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के बारे में बता रहे थे। इसी दौरान मैंने तय कर लिया कि मैं भी इस अभियान को लेकर काम करूंगा। हालांकि मैंने तरीका थोड़ा अलग चुना। मैंने गरीब घर की बच्चियों को जन्मदिन पर केक देना शुरु किया। साथ ही सरकारी अस्पतालों में बच्चियों के जन्म की जानकारी लेने लगा। फिर उनके घर पर केक पहुंचाने लगा। बताया जाता है कि 100 रुपये की कीमत का 250 ग्राम केक बच्चियों के जन्मदिन पर फ्री में दिया जाता है। वह सालाना 7 हजार किलो केक फ्री में बांटते हैं।

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