Friday, April 23, 2021
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6 लाख से ज्यादा जरूरतमंद लोगों को खिलाया खाना, 120 दिन लगातार भोजन करवाने में खर्च हुए करोड़ों रुपये

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New Delhi: भूखे को समय पर भोजन मिल जाए। इससे बढिय़ा क्या हो सकता है। आज बात ऐसे ही शख्स की जिन्होंने जरूरतमंद लोगों को भोजन कराकर मानवता की मिसाल पेश की हैं। आंध्र प्रदेश के तेनाली में श्री श्री चंद्रशेख गुरु पादुका पीठम और श्री रामायण नवान्निका यज्ञ ट्रस्ट के द्वारा लॉकडाउन में लाखों जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया गया। बताया जाता है कि तेनाली के निवासी विष्णुभटला अंजनेय च्यानुलु ने 27 साल पहले जरूरतमंद लोगों की मदद करने के उद्देश्य से इस संस्था की स्थापना की थी। इस संस्था के तहत कई छात्रों को छात्रवृत्ति भी मिली है।

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लॉकडाउन में लोगों के जीवन को सरल बनाने का उठाया जिम्मा
22 मार्च 2020 को देश में कोराना के चलते लॉकडाउन लगाया गया था। इस दौरान विष्णुभटला ने निश्चय किया कि वह इस चुनौतीपूर्ण समय में लोगों के जीवन को आसान बनाने का काम करेंगे। इस दौरान उन्होंने गरीब लोगों को खाना खिलाना शुरु किया। इस ट्रस्ट के द्वारा 23 मार्च को 50 किलो राशन तैयार किया और स्लम बस्ती में बांटा गया।

जगह किए गए चिन्हित, और राशन बांटा गया
ट्रस्ट के द्वारा 50 किलो राशन बांटने के बाद सदस्यों ने सोचा कि सिर्फ एक स्लम बस्ती में राशन बांटने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। सदस्यों ने शहर में घूम-घूमकर 24 क्षेत्रों की पहचान की। जहां पर कोराना के चलते 6 हजार लोग अपनी आजीविका खो चुके थे। इन लोगों की मदद की गई।

लॉकडाउन के दौरान दिया काम
ट्रस्ट के सदस्यों ने कुछ ऐसे लोग ढूंढ़ निकाले जो खाना बनाने का काम करते थे। लेकिन कोराना के चलते उनकी भी आजीविका छीन गई थी। लेकिन वह काम करने के लिए तैयार थे। ट्रस्ट की ओर से इन्हें काम दिया गया, और फिर इनकी मदद से उन 24 जगहों पर खाना वितरित किया गया। ट्रस्ट के सदस्यों ने यह कोशिश की किसी को भोजन खराब न मिले। भोजन की गुणवत्ता की जांच खुद ट्रस्ट के सदस्य कर रहे थे।

62 दिन रोजाना खर्च हुए एक लाख रुपये
ट्रस्ट की ओर से जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाने में रोजाना 1 लाख रुपये का खर्च आया। यह सफर 62 दिन तक चला। इनके काम को देखते हुए बाद में कुछ जाने माने लोग भी मदद करने के लिए आगे आए।

जब लोग आए मदद करने तो 120 दिन हुई जरूरतमंद लोगों की मदद
बताया गया कि जब दूसरे शख्स भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आए तो 120 दिनों तक जररूतमंद लोगों को भोजन खिलाया गया। जरूरतमंद लोगों की मदद करने वाले सदस्यों का कहना है कि उन्हें गर्व महसूस होता है। और वह जब बाहर निकलते हैं तो उन्हें दूसरे लोगों से सम्मान व स्नेह प्राप्त होता है।

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