Wednesday, January 20, 2021
- Advertisement -

बेटियां बोझ नहीं, बाबूजी ने छह बेटियों को शिक्षा दिलाकर बनाया काबिल, एक बेटी है प्रोफेसर तो दूसरी हैं पत्रकार

Must Read

सलाम है इस शिक्षक को, हर रोज घोड़े पर बच्चों को पढ़ाने के लिए 18 किलोमीटर दूर जाते हैं वेंकटरमन

गुरू और शिक्षक किसी की भी तकदीर बनाने में सक्षम माने जाते हैं। कहते हैं कि शिक्षक उस दीपक...

किसी की मोहताज नहीं होती कामयाबी, प्रिंस ने साबित कर दिखाया, बनाया ऐसा पक्षी, जो बचाएगा हजारों जिदंगी

कहते है कि कामयाबी किसी की मोहताज नहीं होती। जिसके अंदर काबलियत होगी, कामयाबी उसकी चौखट पर खड़ी होती...

New Delhi: बेटियों को बोझ मानने वाले लोगों को यह समझना होगा कि अब वक्त बदल रहा है। आज की बेटियां बेटों की तुलना में उनसे कहीं ज्यादा नाम कमाने की क्षमता रखती हैं। चाहे बात यूपीएससी परीक्षा की हो या फिर डॉक्टर-इंजीनियर बनने की। हर क्षेत्र में बेटियों ने अपने नाम का डंका बजाया हुआ है। फिर भी हमारे समाज में संकुचित मानसिकता रखने वाले लोगों की कमी नहीं है। 21वीं सदी में रहने वाले लोग आज भी बेटियों को बोझ समझते हैं। बेटियों के जन्म से ही उन्हें सिर्फ घरेलू कामकाज में उलझाए रहते हैं और कम उम्र में शादी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन सिर्फ शादी करना ही जिम्मेदारी नहीं होती है। बेटियों को शिक्षा दिलाकर उन्हें काबिल बनाने की जरूरत है। फिर देखिए बेटियां भी किसी से कम नहीं है। बहरहाल, आज हम आपके लिए एक ऐसे शख्स की स्टोरी लेकर आए हैं, जिनके घर एक नहीं बल्कि छह बेटियों ने जन्म लिया। इन बेटियों को बोझ न मानकर,पिता ने उन्हें अपनी शक्ति मानकर सभी बेटियों को शिक्षा दिलाई। आज इसी का परिणाम है कि सभी बेटियां उच्च शिक्षा पाकर काबिल बन चुकी हैं। बाबूजी की छह बेटियों में उनकी बड़ी बेटी दिल्ली में सीनियर पत्रकार के तौर पर एक नेशनल अखबार के लिए काम कर रही हैं। वहीं उनकी दूसरी बेटी दिल्ली विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं। छह बेटियों में से चार बेटियों की शादी हो चुकी हैं, और सभी अपने जीवन में खुश हैं। चलिए जानते हैं इस परिवार के बारे में

परिवार में रहते हैं यह सभी लोग
छह बेटियों के माता-पिता का नाम गिरिजा शंकर व उमा सिंह जी है। इनकी छह बेटियों के नाम कुछ इस प्रकार हैं। बड़ी बेटी का नाम अनामिका सिंह, दूसरी बेटी रिचा सिंह, तीसरी बेटी अर्चिता सिंह, चौथी बेटी अभिलाषा सिंह, पांचवी बेटी आस्था सिंह, और छठवीं बेटी का नाम अवंतिका सिंह और इकलौते बेटे का नाम अभिजीत सिंह है।

गोरखपुर के रहने वाले हैं गिरिजा शंकर सिंह

छह बेटियों को काबिल बनाने वाले गिरिजा शंकर सिंह उर्फ (बाबूजी) मूलरुप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर थाना-बांसगांव, गगहा, ग्राम कुनेलपुर के रहने वाले हैं। वह पिछले दो दशक से दिल्ली के द्वारका इलाके में रहते हैं। गिरिजा शंकर जी के बारे में एक कहावत बड़ी मशहूर है कि उन्होंने कभी अपनी छह बेटियों में भेदभाव नहीं किया।

शिक्षा को लेकर थे गंभीर
अपने पिता गिरिजा शंकर जी के बारे में बात करते हुए उनकी बड़ी बेटी अनामिका सिंह जी, जो दिल्ली के एक नेशनल अखबार में बतौर सीनियर पत्रकार हैं। वह कहती हैं कि उनके पिता शिक्षा को लेकर काफी गंभीर थे। वह मानते हैं कि शिक्षा एक ऐसा हथियार है. जिससे किसी भी तरह का युद्ध जीता जा सकता है। वह बताती हैं कि उनके पिता हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं या नहीं। अगर हम छह बहने पढ़ाई के दौरान खेलते पाए जाते थे, तो डांट भी बाबूजी लगा दिया करते थे।

मां के नजदीक हैं सभी बेटियां
मां के साथ बेटियों का हमेशा ही गहरा लगाव रहा है। यही वजह है कि इस घर की सभी बेटियां अपनी मां उमा सिंह जी के साथ काफी क्लोज हैं। बेटियां कहती हैं कि अगर पिता ने उन्हें शिक्षा दिलाकर काबिल बनाया है तो मां ने उन्हें संस्कार दिए हैं। साथ ही लजीज व्यंजन बनाना भी सिखाया है।

डीयू में प्रोफेसर हैं तीसरी बेटी
गिरिजा शंकर जी उर्फ (बाबूजी) की तीसरी बेटी अर्चिता सिंह ने पीएचडी कर परिवार का नाम रौशन किया है। वह बतौर प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं। अर्चिता जी बताती हैं कि पिताजी ने हमेशा सपोर्ट किया है। स्कूली शिक्षा लेने के बाद फिर कॉलेज व इसके बाद पीएचडी जैसी डिग्री लेने के दौरान पिताजी व माता का सहयोग रहा। वह कहती हैं कि समाज में बेटियों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जिससे वह भी अपनी पहचान बना सके।

क्या कहते हैं छह बेटियों के पिता
गिरिजा शंकर उर्फ (बाबूजी) कहते हैं कि बेटा या बेटी दोनों में तुलना नहीं होनी चाहिए। दोनों को सामान्य की तरह ही मानना चाहिए। मैंने अपने बच्चों में कभी भेदभाव नहीं किया। मेरा फर्ज था कि पिता के तौर पर मैं बेटियों को शिक्षा दिलाऊ, जो कि मैंने दिलाई। आज बेटियां पढ़-लिखकर काबिल है, और अपने-अपने फिल्ड में सफल हो रही हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है। ऐसा लगता है कि मैंने जो तपस्या की थी, वह बेटियों को सफल होने के बाद पूरी हो रही हैं। वह कहते हैं कि बेटियों को बोझ नहीं समझना चाहिए, बल्कि उन्हें पढऩे की आजादी देनी चाहिए।

छोटा बेटा थियेटर कलाकार
गिरिजा शंकर जी का इकलौता बेटा अभिजीत सिंह यूं तो स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं, और साथ ही थियेटर भी कर रहे हैं। उन्होंने हाल में ही मंडी हाउस के कमानी सभागार में एक नाटक में मुख्य भूमिका निभाई थी।

छोटी बेटी किसी से कम नहीं
गिरिजाशंकर जी की छोटी बेटी अवंतिका सिंह स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं, और अब एमए की पढ़ाई कर रही हैं। अवंतिका ने एनसीसी में ट्रैनिंग ली है, साथ ही वह 26 जनवरी व 15 अगस्त पर होने वाली परेड की अगुवाई भी करती हैं।

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -