Wednesday, January 27, 2021
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पिता का एक्सीडेंट हुआ, घर चलाने के लिए की नौकरी, बांटने लगे अखबार, आज हैं पांच शोरूम के मालिक

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

किसी ने कहा कि बेशक आपको अपनी किस्मत का ना मिले, मगर आपकी मेहनत का रिटर्न आपको जरूर मिलेगा। यह बिल्कुल ठीक बात भी है। ऐसी ही कुछ कहानी है अजमेर के रहने वाले भरत ताराचंदानी की। भरत के पिता का बचपन में एक्सीडेंट हो गया था, तब वह मात्र क्लास छठी में पढ़ते थे। घर में कमाने वाला कोई नहीं था। पिता के एक्सीडेंट के बाद पूरा परिवार दाने दाने को मोहताज हो गया। सिर पर कर्जा चढऩे लगा। इसके बाद भरत और उनके भाई का संघर्ष करने का ऐसा सिलसिला चला , जो सालों चलता गया।

नहीं सोचा था कमाएंगे इतना पैसा

भरत और उनके परिवार ने इस संघर्ष को देखते हुए कभी भी सोचा नहीं था कि एक दिन वह करोड़ों रुपए के व्यापार के मालिक भी होंगे। यह कहानी उन लोगों के लिए खासी पे्रेरणा है, जोकि अपने कठिन समय को देखते हुए सभी उम्मीदें त्याग देते हैं। भरत ताराचंदानी का कहना है कि उम्मीद और मेहनत कभी नहीं छोडऩी चाहिए। आज आपको बताते हैं इस परिवार की जमीन से आसमान पर उड़ान भरने की कहानी।

दोनों भाईयों की नौकरी और बांटे अखबार

भरत और उनके भाई ने देखा कि अब उनके पास खुद काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। घर में पिता ही अकेले कमाने वाले थे और अब वह भी दाने दाने को मोहताज होने लगे हैं। तब भरत के बड़े भाई ने एक मेडीकल स्टोर पर काम शुरू किया, मां ने कपड़े सिलने का काम अपना लिया और भरत भी एक किराने की दुकान पर काम करने लगे। इसके साथ साथ भरत ने सुबह अखबार बांटना भी शुरू कर दिया। इस परिवार ने हर वो छोटा मोटा काम किया, जिससे उनके घर में चार पैसे आने लगे। कई सालों तक ये सभी इसी प्रकार से अपना काम चलाते रहे।

भाई गए विदेश और की नौकरी

इस बीच भरत के बड़े भाई को पश्चिम अफ्रीका जाने का मौका मिला। दरअसल भरत का ताल्लुक सिंधी समाज से था। जोकि या तो पैसा कमाने विदेश जाते थे या फिर अपना व्यापार करते थे। इसका फायदा भी उन्हें मिला और उनके भाई विदेश चले गए। वहां उन्होंने कड़ी मेहनत की और नौकरी करने लगे। भाई वहां से पैसे भेजते थे,जिससे वह अपने परिवार को चलाने के साथ साथ अपना कर्ज भी चुका रहे थे। चार साल तक उनके भाई वापिस पुष्कर आ गए और नौकरी करने लगे।

भरत ने भी किया दुबई का रूख

इस बीच भरत ने भी 12 वीं तक शिक्षा कर ली थी और फिर वह अपने मामा के रिलेशन की वजह से दुबई चला गया। दुबई जाकर भरत ने कड़ी मेहनत की और एक टेक्सटाईल कंपनी में नौकरी शुरू की। दुबई में खूब मेहनत और मजूदरी करने के बाद भी भरत उम्मीद अनुसार पैसा नहीं कमा पा रहा था। पांच साल तक नौकरी करने के बाद वह वापिस लौटकर अजमेर आ गया।

दोनों ने दुकान खोलने का फैसला किया

वापिस आने के बाद दोनों भाईयों ने विचार किया कि कब तक ऐसे नौकरी करते रहेंगे। इससे अच्छा तो अपना काम शुरू किया जाए। यह सोचकर दोनों भाईयों ने एक दुकान खोलने का निर्णय लिया। तब भरत ने अपने एक दोस्त से कुछ लाख रुपए उधार लेकर एक दुकान लीज पर ले ली। लेकिन यह दुकान ऐसी जगह थी, जहां कोई बाजार नहीं था। हालांकि उनके इस निर्णय पर लोगों ने उनका मजाक भी बनाया। लेकिन जिस जगह उनकी दुकान थी, वहां आसपास होटल और धर्मशाला काफी संख्या में थी। जिसका फायदा उठाने की उन्होंने सोची और उनकी यह ट्रिक काम कर गई।

इस ट्रिक से चलने लगी दुकान

उन्होंने टूरिस्ट गाईड और ड्राईवर को पांच प्रतिशत इंसेटिंव देना शुरू कर दिया। उनसे कहा गया था कि जितने ग्राहक लाओगे, उतना इंसेटिंव दिया जाएगा। इस ट्रिक पर काम शुरू हुआ और देखते ही देखते उनकी दुकान पर ग्राहकों की लाईन लग गई। रात रात भर दुकान पर ग्राहकों का मेला लगने लगा। इस तरह से उनकी दुकान ने बड़ा बिजनेस शुरू कर दिया । यह देखकर उनके आसपास और दुकानें भी खुलने लगीं। इसके बाद उन्होंने कुछ और बड़ा करने के इरादे से अपनी दुकान को एक बड़े शोरूम में बदल लिया। इसके बाद अब अजमेर में उनकी पांच और दुकानें हैं, जिनका टर्नओवर करोड़ों रुपए पहुंच गया है। भरत बताते हैं कि संघर्ष और कठिन दौर में कभी धैर्य नहीं खोना चाहिए।

Source- Dainik Bhaskar

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