Thursday, April 22, 2021
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पिता का हुआ निधन, मां ने दूर की बेटी की मुश्किलें, इस तरह से बर्तन धोते हुए इल्म बन गई IPS आफिसर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

इल्म की कहानी किसी हिन्दी फिल्म से कम नहीं है। वह 14 साल की थी, तभी उनके पिता का असमय निधन हो गया था। तब उनके छोटे भाई की उम्र महज 12 साल थी। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधे पर आ गई। बच्चों को पढ़ाना और घर चलाना एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई थी। मगर इल्म की मां ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने जिम्मेदारियों को बाखूबी संभाल लिया। परिवार व अन्य लोगों ने बेटी इल्म की शादी करने की सलाह दी। पंरतु गमों के पहाड़ तले दबी इल्म की अम्मी ने अपनी बेटी को कभी बोझ नहीं समझा और किसी की मानने की बजाए अपनी बेटी को उच्च शिक्षा देने का निर्णय लिया।

Instagram / ILMA AFROZ

पढऩे में अव्वल थी इल्म

इल्म ने भी अपनी मां के दुखों को समझा और पढ़ाई में कभी भी किसी तरह की शिकायत नहीं आने दी। वह शुरू से ही पढऩे में अव्वल थी। यही वजह थी कि इल्म ने अपनी मेहनत के दम पर वजीफा पाया और अपनी पढ़ाई पूरी की। हालांकि इस दौरान लोगों ने उनकी मां को ताने भी दिए,मगर उन्होंने सुनी सभी की और की अपने मन की। वहीं दूसरी ओर इल्म ने अपनी पूरी उच्च शिक्षा वजीफे के आधार पर ही पूरी की।

यूपी के छोटे से गांव से विदेश पहुंची इल्म

बता दें कि इल्म यूपी के एक छोटे से कस्बे कुंदरकी की रहने वाली हैं। इस छोटे से गांव से निकलकर ही इल्म ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक का सफर तय किया। लेकिन इस रास्ते में इतने कांटे थे,जिन्हें चुनने का काम उनकी मां ने किया। अम्मी ने अपनी बेटी के रास्ते में पड़े सभी कांटों को हटाया और उसे इस काबिल बनाया कि आज वह अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं। लेकिन इस मंजिल पर पहुंचने से पहले तक इल्म और उनकी मां और भाई को कड़ा संघर्ष तथा परिवार के बाकि लोगों की जली कटी बातें और विरोध सहना पड़ा था।

एक दिन में नहीं एक दिन जरूर मिलती है सफलता

कहते हैं कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, यदि ठान लो तो एक दिन जरूर मिलती है। इस कहावत को सही साबित करते हुए इल्म जब न्यूयॉर्क पढऩे के लिए जाने वाली थी, उससे पहले लोगों ने उनकी अम्मी को ऐसा नहीं करने देने के लिए कहा। उन्होंने ताने देते हुए कहा कि लडक़ी हाथ से निकल जाएगी। पंरतु अम्मी ने किसी की परवाह नहीं की और अपनी बेटी को प्रोत्साहन दिया। इल्म ने भी अपनी मां की खातिर किसी प्रकार से समझौता नहीं किया। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढऩे के लिए जब इल्म न्यूयॉर्क पहुंची तो वहां भी उसे खूब संघर्ष करना पड़ा।

बर्तन धोने का काम भी किया इल्म ने

इल्म ने विदेश में रहने के दौरान अपने खर्चे निकालने के लिए घरों में बर्तन धोए, बच्चों को टयूशन पढ़ाई और उनका ध्यान रखने का काम भी किया। इस तरह से इल्म ने अपनी शिक्षा पूरी की। हालांकि इस दौरान इल्म को विदेश में ही अच्छी नौकरी का ऑफर मिला था। मगर उसने इस ऑफर को ठुकरा दिया। वह अपनी उच्च शिक्षा को अपनी देश सेवा के लिए प्रयोग करना चाहती थी। विदेश से आने के बाद उसके मन में यूपीएससी करने का ख्याल आया। उनके भाई ने भी इसके लिए प्रोत्साहित किया।

यूपीएससी करने के बाद आईपीएस बनीं इल्म

इल्म ने साल 2017 में यूपीएससी की परीक्षा दी और महज 26 साल की उम्र में 217 वीं रैंक के साथ इसे पास कर लिया। यूपीएससी क्लीयर करने के बाद इल्म ने आईएएस या विदेश सेवा की बजाए आईपीएस को चुना। वह आज आईपीएस बनकर देश की सेवा में जुटी हैं। इल्म और उनकी अम्मी ने जिस तरह से यह संघर्ष भरा रास्ता चुना, वह अपने आप में बेमिसाल है। सिटीमेल न्यूज इस परिवार के हौंसले, संघर्ष, कठिन परिश्रम और बेहतरीन जज्बे को सलाम करता है।

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