Friday, April 23, 2021
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पिता का हुआ इंतकाल, आर्थिक संकट झेलकर भी गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही है आबिदा

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

मुस्लिम धर्म में कई कुरीतियां हैं  जिसमे सबसे बड़ी पर्दा प्रथा  है जिसका पालन वो लोग करते है। मुस्लिम महिलाओं को जब भी बाहर  जाना हो तो उन्हें बुरका पहन कर निकलना पड़ता है।  हालांकि  कई मुस्लिम महिलाएं  इसका विरोध भी कर चुकी है। ऐसे में इसी समाज की एक बेटी शिक्षा की मशाल लिए पिछले कई सालों से गरीब बच्चों की जिंदगी सवारने में लगी हुई है।

आबिदा परवीन  सौ बच्चों  को दे रही है तालीम

धनबाद के वासेपुर की रहने वाली आबिदा परवीन गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रही है। आबिदा बीएड की पढ़ाई कर चुकी और10वी, 11 वीं  और 12वीं पढ़ने  वाले करीब सौ बच्चो को पढ़ा रही है। आबिदा का कहना है कि उसे सरकारी नौकरी की चाह नहीं है। बच्‍चों को अच्छी तालीम देने में ही उसको आत्म संतुष्टि मिलती है। उसने बताया कि सात साल से पहले वह समाधान संस्था से जुड़ी है । इस संस्‍था के संस्थापक चंदन सिंह समाधान संस्‍था के माध्‍यम से गरीब बच्‍चों को पढ़ा रहे थे। वह उनकी बहन दीपा सिंह से मिली। कोरोना वायरस संक्रमण के पूर्व झरिया चिल्ड्रेन पार्क में बच्चों को सामूहिक रूप से पढ़ाती थी। कोरोना के कारण बच्‍चों को वो ऑनलाइन पढ़ाने लगी। केसी बालिका विद्यालय  झरिया की प्रतिभा कुमारी, नेहा कुमारी, अंशु कुमारी ने मैट्रिक में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर आबिदा की मेहनत सार्थक कर दी

आबिदा को मां व भाई ने प्रोत्साहित किया

आबिदा का कहना है कि  बच्चों  को निःशुल्क शिक्षा देने के लिए परिवार ने कभी रोक-टोक नहीं किया। 2015 में पिता नवाब असगर अली का  इंतकाल हो गया। उसने बताया कि उसकी माँ नूरजहां बेगम ने पढ़ने और पढ़ाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित ही किया। उसका भाई नवाब जफर अली ने भी हौसला बढ़ाया। उसका कहना है कि वो इसी प्रकार अपने मिशन पर आगे बढ़ती रहेंगी। आबिदा की सेवाओं को देखते हुए धनबाद में गुरु सम्मान समारोह में उसे सम्मानित भी किया गया।

 

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