Wednesday, April 21, 2021
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एक्सीडेंट में गंवाया एक पैर, पिता का हुआ निधन, फिर भी तान्या ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक साईकिल से रचा इतिहास

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

जिदद करो और जीतकर दिखाओ, ये कहानी है 25 साल की उस युवती की, जिसने एक एक्सीडेंट में अपना एक पैर गवां दिया। लेकिन तमाम विपरित हालातों के बावजूद हार नहीं मानी और खुद को साबित करके दिखाया। यहां बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावर शहर की रहने वाली तान्या डागा की। तान्या ने एक एक्सीडेंट में अपना एक पैर खो दिया था। इसके बावजूद उसने एक पैर से ही साईकिल चलाई और जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक 3800 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर अपने परिवार व शहर का नाम रोशन कर दिखाया।

AAJ TAK

तान्या ने इस तरह से रचा इतिहास

तान्या ने अपने एक पैर से साईकिल चलाते हुए 19 नवंबर को यात्रा शुरू की थी और 31 दिसंबर को इसे पूरा कर दिखाया। तान्या ने यह कारनामा करके खुद को देश की पहली महिला पैरा साईकिलिस्ट बनाकर एक इतिहास रच दिया। बता दें कि तान्या का यह सफर दुखों से भरा हुआ है। वर्ष 2018 में वह देहरादून गई थी, वहां एक कार से उसका एक्सीडेंट हुआ और डाक्टरों को उसे बचाने के लिए एक पैर काटना पड़ा। 6 महीने तक तान्या का ईलाज चला और हजारों टांके लगाए गए।

इस संस्था ने दी प्रेरणा

इसके बाद तान्या सामाजिक संस्था आदित्य मेहता फाऊंडेशन के संपर्क में आई और उनकी प्रेरणा से एक पैर से साईकिल चलाने लगी। हालांकि साईकिल चलाने के दौरान उसके पैर से खून निकलने लगता था और वह दुख से चिल्लाने लगती थी। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और लगातार साईकिल चलाने की प्रेक्टिस करती रही। सबसे पहले उसने 100 किलोमीटर साईकिल चलाई, जिसमें वह टॉप दस लोगों में शामिल की गई।

बीएसएफ के आयोजन से मिली पहचान

इसी दौरान बीएसएफ द्वारा कश्मीर से कन्याकुमारी तक साईकिलिंग का आयोजन किया गया। इनमें से 30 साईकिल चलाने वाले प्रतिभागियों में से 9 पैरा साइकिल चलाने वाले थे। इस आयोजन में तान्या ने एक पैर से इतनी लंबी साईकिल चलाई कि सभी हैरान रह गए। बीएसएफ ने विशेष तौर पर तान्या को सम्मातिन किया।

हो गया था पिता का निधन

तान्या की यह कहानी ना केवल दुखों से भरी हुई है, बल्कि हैरान कर देने वाली है। तान्या ने जब इस आयोजन में हिस्सा लिया तो वह बेंगलरू पहुंची थी तब 18 दिसंबर को उसे सूचना मिली कि उनके पिता का निधन हो गया है। यह सुनकर दुखी हुई तान्या अगले ही दिन अपने शहर ब्यावर पहुंची। मगर यह उसका हौंसला ही था कि इस दुख की घड़ी को झेलते हुए वह 22 दिसंबर को अपनी यात्रा के लिए वापिस पहुंच गई। इसके बाद वह फिर से आयोजन में हिस्सा लेने पहुंच गई। तान्या ने अपने पिता के निधन के बावजूद भी अपना हौंसला नहीं छोड़ा और अपने जज्बे को पूरा करने के लिए जुट गई। सिटीमेल न्यूज ऐसी साहसी व हिम्मत वाली युवती के जज्बे को सलाम करता है।

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