Thursday, April 22, 2021
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पिता जीवन भर बेचते रहे चाय, बेटी ने रचा इतिहास और बन गई इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर

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कहते हैं कि मुसीबतों से कभी घबराना नहीं चाहिए, एक दिन आपकी मेहनत जरूर रंग लाती है। मुसीबतों से जो डर गया, वह कभी सफल नहीं हो सकता। यह कहना है नीमच में चाय की दुकान चलाने वाले सुरेश गंगवाल का। गंगवाल ने अपनी पूरी जिदंगी चाय बेची, मगर कभी कठिनाईयों से हारे नहीं। यही वजह है कि आज उनकी बेटी भारतीय वायुसेना में फ्लाईंग अफसर के पद पर हैं तो बेटा इंजीनियर बनकर अपने माता पिता का नाम चमका रहा है। उनकी तीसरी बेटी भी उच्च शिक्षा हासिल कर बड़ा सपना देख रही हैं।

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आज भी चाय बेचते हैं सुरेश
सुरेश गंगवाल ने नीमच शहर में चाय की दुकान चलाते हुए अपनी तीनों बच्चों को खूब पढ़ाया लिखाया है। उनकी यह तपस्या उस समय रंग लाई, जब बड़ा बेटा इंजीनियर बना तो दूसरे नंबर की बेटी ने वायु सेना में आफिसर बनकर अपने पिता का सपना पूरा किया। तीसरी बेटी भी तरक्की की राह पर है। बता दें कि सुरेश गंगवाल की बेटी आंचल गंगवाल ने भारतीय वायुसेना की अफसर बनकर बड़ा नाम बनकर दिखाया है। बीते वर्ष जून में आंचल ने यह पद पाया और राष्ट्रपति पट्टिका का सम्मान भी हासिल किया। पूरे परिवार ने जब बेटी आंचल को परेड में मार्च पास्ट करते हुए देखा तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। बता दें कि सुरेश आज भी चाय की दुकान चलाते हैं

केदारनाथ हादसे के बाद देखा था सपना
बता दें कि आंचल ने केदारनाथ हादसे के बाद ही एयरफोर्स में आफिसर बनने की ठानी थी। तब वह 12 वीं क्लास में पढ़ रही थी। लेकिन शुरू से ही मेहनत और लगन से पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2018 में आंचल एयरफोर्स में चुनी गई थी। इससे पहले आंचल को दो बड़ी सरकारी नौकरी भी मिली। एक बार वह मध्यप्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुई। मगर उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी, इसके बाद उन्हें लेबर इंस्पेक्टर बनने का अवसर मिला। मगर यह नौकरी भी उन्होंने छोडक़र भारतीय एयरफोर्स में जाने की तैयारी शुरू कर दी।

मगर नहीं था आसान
पंरतु इंडियन एयरफोर्स में जाने के लिए परीक्षा को पास करना आसान नहीं था। इस जॉब में जाने के लिए आंचल को पांच बार इंटरव्यू बोर्ड के सामने बैठना पड़ा। छठे प्रयास में उसे सफलता मिली और वह उन 22 लोगों में शामिल कर ली गई, जिन्हें एयरफोर्स सेवा के लिए चुना गया था। इस पद पर चुने जाने वाली आंचल मध्यप्रदेश की पहली लडक़ी थी, जिन्होंने इस कठिन परीक्षा को पास कर अपने परिवार का नाम रोशन किया था।

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