Saturday, November 27, 2021
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हाथ टूट गया, मगर हार नहीं मानी,13 साल के बच्चे ने अपनी बहन और स्कूली बच्चों को बिगड़ैल बैल से बचाया

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बहादुरी की कोई उम्र नहीं होती। ये साबित कर दिखाया है कुंवर दिव्यांशु ने, जिसने अपनी बहादुरी के दम पर एक बिगड़े हुए बैल के हमले से अपनी बहन को बचाया था। वह बिना कुछ सोचे इस उग्र बैल से जा भिड़ा और लहुलूहान होने के बावजूद अपनी बहन और सात दोस्तों को उससे बचाने में सफलता पाई। इस छोटे से बालक की हिम्मत और जोश देखकर बैल को भी वहां से भागना पड़ा। इस बहादुर बच्चे से प्रभावित होकर इस वर्ष उसे प्रधानमंत्री ने बाल पुरस्कार से नवाजा है।

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कई पुरस्कार पा चुका है दिव्यांशु

यह कहानी है जिला बाराबांकी के नवाबगंज तहसील के मखदूमपुर के रहने वाले दिव्यांशु की। यह बालक अब तक राष्ट्रीय और स्टेट लेवल पर दो दर्जन से भी अधिक पुरस्कार हासिल कर चुका है। उसकी बहादुरी का ही कमाल है कि वर्ष 2021 में जिन बच्चों को बहादुरी पुरस्कार दिया गया है, उनमें दिव्यांशु का नाम भी शामिल है।

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बच्चे ने 13 की उम्र में दिखाया था कारनामा

दिव्यांशु ने करीब तीन साल पहले , जब उसकी उम्र मात्र 13 साल थी, तब जनवरी 2018 में अपनी पांच साल की बहन समधि के साथ स्कूल से घर वापिस आ रहा था। तभी रोडवेज बस स्टैंड के पास एक बिगड़ैल बैल ने समधि और पांच अन्य स्कूली बच्चों पर हमला बोल दिया। यह देखकर दिव्यांशु इन सभी बच्चों को बचाने के लिए बैल के सामने कूद पड़ा। वह अपने स्कूल बैग से बैल पर हमलाकर उसे भगाने की कोशिश करने लगा। बैल ने जब इस बच्चे की बहादुरी को देखा तो वह भी वहां से भाग खड़ा हुआ।

हाथ टूट गया, मगर हार नहीं मानी

बैल से भिडं़त में दिव्यांशु अपनी बहन सहित सभी बच्चों को बचाने में तो सफल रहा, मगर इस दौरान उसके दाहिना हाथ चार जगह से टूट गया। जिसने भी इस बच्चे की बहादुरी को देखा, उसने उसे सलाम जरूर किया। शहर में इस बच्चे की बहादुरी के किस्से भी लोगों ने खूब कहे थे। इसके बाद अचानक दिव्यांशु के परिवार वालों को प्रधानमंत्री कार्यालय से एक पत्र प्राप्त हुआ। जिसमें दिव्यांशु को बाल पुरस्कार से सम्मानित करने की जानकारी दी गई।

छाया खुशी का माहौल

यह पत्र प्राप्त होते ही घर में खुशी का माहौल छा गया। बीते सोमवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांशु से बात की तथा उसे इस पुरस्कार से नवाजा। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्री कोविंद, तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इन सभी ने भी दिव्यांशु की बहादुरी की जमकर प्रशंसा की।

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