Thursday, April 22, 2021
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जानिए कैसे,टीचर की नौकरी छोडक़र शुरू किया बिजनेस, इस युवक ने चावल की बेकार भूसी से कमाए लाखों रुपए

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विभू उस शख्स का नाम है, जो कभी टीचर की नौकरी किया करते थे। मगर वह कुछ बड़ा करना चाहते थे। यह सोचकर साल 2007 में उन्होंने टीचर की नौकरी छोडक़र अपना बिजनेस करने का मन बनाया। करीब सात साल तक वह इस रिसर्च में लगे रहे कि आखिर करना क्या है। तब उन्होंने शुरू किया चावल मिल का व्यवसाय। देखते ही देखते उनका काम चल निकला। यह कहानी है उड़ीसा के कालाहांडी में रहने वाले इस 40 वर्षीय जुनूनी शख्स की।

बेकार भूसी की परेशानी की दूर

विभू ने इस दौरान अपनी मिल में निकलने वाले चावल की बेकार भूसी को अपनी सूझबूझ से काला सोना बना लिया और विदेशों में उसे एक्सपोर्ट करने लगे। इससे उन्हें लाखों रुपए की अतिरिक्त इंकम भी हो रही है। आइए आपको बताते हैं कि विभू ने कैसे बेकार पड़ी चावल की भूसी को काला सोना बना लिया। दरअसल विभू की मिल में चावल बनाने के बाद काफी अधिक मात्रा में भूसी बचती थी। जोकि एक तरह से उनके लिए किसी काम की नहीं थी। जिसे वह जलाना भी नहीं चाहते थे, क्योंकि उसे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचता था। मगर उनके पास इतनी जगह भी नहीं थी कि वह बेकार भूसी को अपने पास ही रखा रहने दें।

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अब विदेशों में बेच रहे हैं भूसी

काफी रिसर्च और पूछताछ के बाद विभू को पता चला कि यह भूसी स्टील कंपनियों के लिए बहुत काम की है। यह पता चलते ही उन्होंने कई स्टील कंपनियों से संपर्क किया और उन्हें भूसी की आपूर्ति करने लगे। बताते हैं कि स्टील कंपनियों में भूसी का प्रयोग थर्मल इंस्सुलेटर के तौर पर किया जाता है। यही वजह है कि स्टील कंपनियों को भी भूसी की काफी अधिक जरूरत महसूस होती है।

यूक्रेन, मिस्त्र और ताईवान में जाती है भूसी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार विभू को यह तरीका इतना अच्छा लगा कि वह अब चावल की भूसी को विदेशों में भी भेज रहे हैं। यूक्रेन, मिस्त्र और ताईवान जैसे देशों में विभू की भूसी करीब 20 लाख रुपए वार्षिक के हिसाब से सप्लाई हो रही है। इस तरह से विभू ने अपनी समझदारी और मेहनत से बेकार भूसी को काला सोना बना लिया और उससे लाखों रुपए की अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं। विभू जैसे युवक खुद तो बड़ा काम करते ही हैं, साथ ही दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बनकर दिखाते हैं।

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