Wednesday, April 21, 2021
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10 साल की उम्र में हुई शादी, पति ने गर्भवती कर दी प्रताडऩा, मदर टेरेसा बनकर 1500 बच्चों को दिया जीवन

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

सिंधू ताई का जीवन इतना कष्टों में बीता कि उनकी कहानी सुनकर अच्छे अच्छों के रौंगटे खड़े हो जाएं। 10 साल की उम्र में मां-बाप ने अपनी इस फूल सी बच्ची को बोझ समझते हुए उसका विवाह कर दिया। 30 साल की उम्र के निर्दयी पति ने इस बच्ची को गर्भवती बना दिया। इसके पति की क्रूरता का आलम यह रहा कि उसने ना केवल खिलौनों से खेलने की उम्र में ना केवल इस बच्ची की कोख भर दी,बल्कि उसे अपने घर से भी निकाल दिया।

sindhutai sapakal

ये कहानी है महाराष्ट्र की मदर टेरेसा की

यह कहानी है महाराष्ट्र की मदर टेरेसा कहलाई जाने वाली सिंधू ताई की। पति द्वारा गर्भवती हालत में घर से निकाल दिए जाने के बाद सिंधू ताई ने एक गौशाला मे अपने बच्चे को जन्म दिया। उस समय वह इतनी अकेली थीं कि उन्हें बच्चे की नाल भी खुद ही काटनी पड़ी। उनके दुखों की कहानी यही खत्म नहीं होती, बल्कि पति के घर में खाना तक नहीं मिलता था, तब उन्हें अपनी बच्ची को पालने के लिए रेलों में भीख मांगनी पड़ती थी। यही नहीं बल्कि कई बार तो सिंधू ताई को श्मशान घाट में चिंता पर पड़ी रोटी उठाकर अपना व अपनी बच्ची का पेट भरना पड़ता था।

फिर 1500 अनाथ बच्चों को दिया नया जीवन

बाद में इसी सिंधू ताई ने अपने संघर्षों व कठिन परिश्रम के बूते ना केवल खुद को पाला, बल्कि एक अनाथ आश्रम की स्थापना भी की। जिसमें उन्होंने 1500 मासूम बच्चों को मां और बाप दोनों का प्यार दिया। एक कार्यक्रम में सिंधू ताई ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इतने कष्ट सहे और देखे हैं, जिनके बाद उनका मन उन अनाथ बच्चों को देखकर विचलित हो जाता था, जिनके मां बाप उन्हें सडक़ पर छोडक़र चले जाते थे। ऐसे बच्चों को पाल पोसकर उन्हें इस लायक बनाया कि वह भी भविष्य में ऐसे ही बच्चों का सहारा बनें।

ये अनाथ बच्चे पहुंचे बड़े पदों पर

सिंधू ताई बताती है कि जिन अनाथ बच्चों को उन्होंने पाला, उनमें से आज कई बच्चे तो इंजीनियर, डाक्टर , प्रोफेसर और वकील बन चुके हैं और कई लोग ऊंचे ओहदों पर विराजमान हैं। वह कई बड़े -बड़े काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों को पालने में उन्हें कई प्रकार की कठिनाईयों व आर्थिक समस्या से भी गुजरना पड़ा, मगर उन्होंने कभी हार नही मानी और कुदरत ने भी उनके इस नेक काम में उनका पूरा साथ दिया। सिटीमेल न्यूज सिंधू ताई के हौंसले, कठिन परिश्रम और दुख की घड़ी में समय बिताने के बावजूद इतना महान करने पर सलाम करता है।

 

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