Sunday, April 18, 2021
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आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए पति, पत्नी ने भी लिया देश सेवा का प्रण और हो गई सेना में भर्ती

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देश पर मरने वालों का यही निशां बाकि होगा। उनके बलिदान को यह देश हमेशा याद रखेगा। इस कहावत को याद रखते हुए एक शहीद की पत्नी ने भी अपने पति की तर्ज पर भारतीय सेना का हिस्सा बनने का सपना देखा है। वह चाहती हैं कि उनके दिवंगत पति उन्हें अपने देश की सेवा करते हुए देंखे। यह कहानी है भारतीय सेना में नायक रहे शहीद दीपक नैनवाल की। जम्मू कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से लड़ते हुए दीपक बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। यह घटना वर्ष 2018 की है, बाद में वह शहीद हो गए।

अस्पताल में हुआ ईलाज, मगर हो गए शहीद

हालांकि दीपक नैनवाल घायल होने के बाद आर्मी अस्पताल में ईलाज करवाते रहे। मौत पर विजय हासिल करने के लिए दीपक संघर्ष करते रहे। इस संघर्ष में उनकी पत्नी ज्योति नैनवाल ने पूरा साथ दिया। अस्पताल में रहते हुए ज्योति ने अपने पति की पूरी देखभाल की। लेकिन कुदरत के सामने वह हार गए और दीपक देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए।

दीपक और ज्योति के हैं दो बच्चे

दीपक और ज्योति के दो बच्चे हैं। बेटा 5 साल और बेटी 8 साल के हैं। पति के शहीद होने के बाद ज्योति और उनका परिवार बुरी तरह से टूट गया। पूरे घर की जिम्मेदारी ज्योति के कंधे पर आ गई। हालांकि पति के जाने के बाद ज्योति भी भीतर से दुखी थी। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। धैर्य और साहस का परिचय देते हुए उन्होंने खुद को तो संभाला ही, साथ ही अपने बच्चों के बेहतर परवरिश करने की भी ठान ली।

ज्योति ने लिया आर्मी में भर्ती होने का फैसला

इसके साथ ही ज्योति ने एक और बड़ा फैसला किया। जोकि उनके महान इरादों को दर्शाता है। पति के शहीद होने के बाद ज्योति ने भी देश सेवा करने का जज्बा दिखाया। उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती का निर्णय लेते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया। हालांकि उनका यह निर्णय हर किसी के लिए हैरान कर देने वाला था। मगर वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटीं। उन्होंने सेना में भर्ती होने की सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं। अब वह चेन्नई स्थित आफिसर्स प्रशिक्षण अकादमी में अपनी टे्रनिंग शुरू कर रही हैं। यानि कि ज्योति ने भी अपने पति की राह पर चलते हुए देश की सेवा करने की ठान ली है।

शहीद दीपक के पिता भी सेना में थे

बता दें कि दीपक और ज्योति का विवाह वर्ष 2011 में हुआ था। ज्योति बताती हैं कि अस्पताल में जब वह उनके साथ थी, तब दीपक कहा करते थे कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे। उनका घाव अधिक खतरनाक नहीं है। मगर किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। दीपक उनका साथ छोडक़र चले गए। उल्लेखनीय है कि शहीद दीपक नैनवाल का परिवार भी भारतीय सेना का अभिन्न अंग रहा है। उनके दादा सुरेशानंद नैनवाल जहां स्वतंत्रता सेनानी थे, वहीं उनके पिता चक्रधर नैनवाल भी सेना से रिटायर हैं। इस परिवार ने भारत -पाकिस्तान युद्व में भी हिस्सा लिया है। इस परिवार के शौर्य, जज्बे और साहस को सिटीमेल न्यूज सलाम करता है।

image source new indian experss

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