Sunday, April 18, 2021
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मर्चेंट नेवी की अफसरी छोडक़र सवार हुई IAS अधिकारी बनने की धुन, मगर होते रहे बार बार फेल

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

यूपीएससी पास करके आईएएस अधिकारी बनने का इतना आकर्षण है कि लोग अपनी अच्छी भली नौकरी छोडक़र इस मोह में खिंचे चले आते हैं। हालांकि इसमें रिस्क भी होता है, इसके बावजूद युवा इस शाही नौकरी के मोह पाश में बंधे चले आते हैं। इस स्टोरी में एक ऐसे ही युवक की कहानी बताएंगे, जिन्होंने आईएएस अधिकारी बनने की खातिर मर्चेंट नेवी की अपनी बढिय़ा नौकरी छोड़ दी।

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पारितोष पंकज ने देखा था ये सपना

बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में पैदा हुए पारितोष पंकज ने आईएएस की नौकरी को पाने के लिए लगातार पांच साल तक मेहनत की। इस तरह से पंकज ने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए काफी संघर्ष भी किया और अपनी नेवी की अफसरी का त्याग कर आईएएस अधिकारी बनने में सफलता पाई। वर्ष 2019 में यूपीएससी की परीक्षा देकर पारितोष ने 142 वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बनने की अपनी धुन को पूरा किया।

आईआईटी के बाद मर्चेंट नेवी में गए

पारितोष ने आरा शहर से ही अपनी 12 वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी की तैयारी की और उनका इसमें चयन हो गया। आईआईटी में मैरिट स्तर पर आने के बाद पारितोष को मर्चेंट नेवी कोर्स में दाखिला मिल गया। इस कोर्स को पूरा करने के बाद इंजीनियर बनें पारितोष को मर्चेंट नेवी के तहत जर्मनी में शिप पर नौकरी मिल गई। वर्ष 2015 तक वह शिप पर ही काम करते रहे।

इस तरह से हुई धुन सवार

इस दौरान उन्हें यूपीएससी करने का जुनून सवार हुआ और वह इसकी तैयारी में जुट गए। नौकरी छोडक़र वह किताबों की दुनिया में खो गए। इस तरह से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2016 में उन्होंने पहली बार परीक्षा दी, मगर वह उसमें सफल नहीं रहे। लेकिन उन्हें इसमें अनुभव बहुत मिला। दूसरी बार जब उन्होंने परीक्षा दी तो वह पास तो हो गए, मगर इंटरव्यू में वह रह गए। इससे परेशानी और निराशा ने उन्हें घेर लिया, मगर वह फिर से साहस जुटाकर अपनी तैयारी में जुट गए।

तीसरी बार फिर हुए फेल

तीसरी बार जब उन्होंने परीक्षा दी तो मैन्स तक पहुंचने में सफल रहे, पंरतु इंटरव्यू में वह कुछ नंबरों से फेल हो गए। चौथी बार वह फिर से तैयारियों में लगे। मगर इस बार जब रिजल्ट आया तो वह निराशजनक नहीं बल्कि उनके लिए खुशी का अवसर लेकर आया था। इस तरह से वह 142 वें नंबर पर आकर आईएएस अधिकारी बनने में सफल रहे। ये है पारितोष पंकज की पूरी कहानी। किस तरह से उन्होंने बिना निराश हुए तीन बार परीक्षा दी और तीनों बार फेल होने के बाद चौथी बार में कामयाबी हासिल की।

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