Saturday, April 17, 2021
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मां रहती है बीमार, पिता हैं नहीं, घर चलाने के लिए इस लडक़ी ने खोल ली चाय की दुकान, बनना चाहती है IAS अफसर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

गरीबी हर इंसान को कुछ सीखने का मौका जरूर देती है। जो लोग अपनी गरीबी को अवसर बना लेते हैं,वह जिदंगी में बहुत तरक्की भी करते हैं। आज हम आपको एक ऐसी लडक़ी की कहानी बता रहे हैं, जिसका जन्म ही गरीबी के दौर में हुआ। पिता का देहांत होने के बाद इस लडक़ी ने खुद का टी-स्टॉल खोल लिया, ताकि वह अपनी मां का सहारा बन सके और खुद की पढ़ाई भी कर सके। यह कहानी है इलाहाबाद की रहने वाली खुशी की।

मां रहती है बीमार

खुशी के पिता की मृत्यु ने उसकी मां को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। इस गम में वह बीमार रहने लगी। घर चलाने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था। दूसरी ओर बेटी खुशी पढ़ लिखकर अफसर बनने का सपना पाले हुए थी। लेकिन यह परिवार अपने मुखिया के निधन के बाद एक ऐसे रास्ते पर आ खड़ा हुआ, जहां उनके सामने केवल और केवल अंधकार है। ऐसे कठिन दौर में खुशी ने अपने दोस्तों की मदद से चाय का एक स्टॉल खोल लिया। नाम दिया गया स्टुडेंट टी-स्टॉल।

खोलनी पड़ी है चाय की दुकान

खुशी की उम्र जहां पढऩे लिखने की थी, वहीं ऐसे कठिन दौर में उसे चाय की दुकान चलाने के लिए बेबस होना पड़ा। देखते ही देखते खुशी ने अपनी चाय की दुकान से अपना घर चलाना शुरू कर दिया। यही नहीं बल्कि इस चाय की दुकान चलाने में उसके दोस्तों ने भी खुशी की पूरी मदद की। इससे होने वाली इंकम से खुशी अपने घर के साथ साथ अपनी पढ़ाई का खर्च भी निकाल रही है।

अपनी क्लास में फस्र्ट आती है खुशी

इलाहाबाद के महाविद्यालय में पढऩे वाली खुशी ने पढ़ाई में अव्वल है और अपनी कक्षा में फस्र्ट आती है। लेकिन इसके बावजूद उसकी जिदंगी एक ऐसे पड़ाव पर है, जिसमें उसके सामने मेहनत करने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है। इसलिए खुशी ने अपना घर और पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए स्टुडेंट टी प्वाइंट के नाम से चाय की दुकान खोल ली। अब वह पढ़ाई करने के बाद अपनी दुकान खोल लेती है। शाम को उसकी दुकान पर चाय पीने वालों की अच्छी खासी तादाद होती है

बनना चाहती है आईएएस अधिकारी

खुशी का मकसद जिंदगी में सफल होना है। इसके लिए वह कठिन से कठिन परिश्रम करने के लिए भी तैयार है। यही वजह है कि अपनी पढ़ाई और घर चलाने के लिए उसे यह कड़ा निर्णय लेना पड़ा। दरअसल खुशी का असली उद्देश्य पढ़ लिखकर आईएएस और पीसीएस की परीक्षा पास करना है। वह एक सफल अधिकारी बनकर समाज की उन लड़कियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनाना चाहती हैं, जोकि उसके जैसा कठिन जीवन जी रही हैं।

सिटीमेल न्यूज करता है सलाम

खुशी का जीवन आज कैसे पड़ाव पर है, इस कहानी को पढक़र सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। खुशी आज दोहरे मार्ग पर चल रही है। उसे ना केवल अपनी बीमार मां को संभालना है, बल्कि अपना घर को चलाते हुए पढ़ाई भी करनी है। सिटीमेल न्यूज ऐसी बहादुर बच्ची के हौंसले व जज्बातों को सलाम करता है।

 

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