Tuesday, April 20, 2021
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देवता से कम नहीं है पदमश्री डा. पाथो, विदेश छोड़ आ गए अपने देश, सालों से कर रहे हैं गरीबों का मुफ्त ईलाज

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

कई लोग ऐसे भी होते हैं कि जो अपनी सभी सुख सुविधा छोडक़र अपना पूरा जीवन समाज के प्रति समर्पित कर देते हैं। ऐसे लोगों को देवतुल्य कहा जाता है। ऐसे ही एक मसीहा के रूप में नाम आता है डाक्टर पाथी का, जिन्होंने विदेश में एक सुखी व समृद्व जीवन छोडक़र आदिवासी इलाके में रहकर लोगों की सेवा करने के कार्य को चुना। वह पिछले कई सालों से इस पुण्य के काम को बाखूबी अंजाम दे रहे हैं।

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निशुल्क करते हैं आदिवासी व गरीबों का ईलाज

डा. पाथी का जन्म बेरहामपुर के पास सुकंडा गांव में हुआ था। वह एक जाने माने आर्थोपेडिक डाक्टर हैं। फिलहाल डा. पाथी को जनजातीय इलाकों में रहकर लोगों की निशुल्क सेवा करने के लिए जाना जाता है। बता दें कि डा. पाथी ने इगलैंड से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई की है। डाक्टर पाथी चाहते तो विदेश में रहकर एक बढिय़ा व ठाठ-बाट का जीवन जी सकते थे। मगर उन्होंने उड़ीसा के बरहमपुर को अपने कार्यस्थली के तौर पर चुना। वहां कई अस्पतालों में अपनी सेवा दी और रिटायरमेंट के बाद सुकुंडा आ गए।

इस तरह करते हैं सेवाभाव

सुकंडा आकर उन्होंने गरीबों की सेवा के प्रति अपना जीवन समर्पित कर दिया। वह तीन दशकों से भी अधिक समय तक अपने सेवा भाव के काम को निशुल्क तौर पर अंजाम दे रहे हैं। इसके अंतर्गत वह आदिवासियों के साथ साथ गरीब लोगों के कई टेस्ट भी मुफ्त में ही करते हैं।

पदमश्री के लिए हुआ चयन

डाक्टर पाथी को उनके सेवाभाव और समर्पण भावना को देखते हुए पदमश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। डा. कहते हैं कि वह इस पुरस्कार को पाकर बहुत ही प्रसन्न हैं। इससे उनका हौंसला और जज्बा बढ़ा है। इस प्रोत्साहन के बाद वह अपने कार्य को और अधिक विस्तार देने का निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने आज के युवा वर्ग से भी अपील की है कि अपनी मिटटी से जुडक़र वह भी समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करें। ताकि समाज के छोटे तबके को उसका हक दिलवाया जा सके।

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