Friday, April 23, 2021
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बैंक की नौकरी से हुए रिटायर, फिर एमबीबीएस में लिया दाखिला, गजब है इस शख्स की अनोखी कहानी

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

बैंक की नौकरी से रिटायर होकर ये शख्स इन दिनों डाक्टर बनने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। फिलहाल उनकी उम्र 64 वर्ष है, लेकिन उनका हौंसला व जज्बा गजब का है। अपनी इस उम्र में एमबीबीएस कर डाक्टर बनने के उनके सपने के पीछे भी एक बड़ी व भावुक कहानी है। नीट की परीक्षा पास करने के बाद फिलहाल वह मेडीकल कॉलेज में पढ़ाई के लिए एडमिशन ले चुके हैं। यह हैरतअंगेज व आश्चर्य कर देेने वाली कहानी है ओडिशा के रहने वाले और सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके जयकिशोर प्रधान की।

एक पैर है खराब, फिर भी आत्मविश्वास की नहीं कमी

श्री प्रधान अपनी बेटियों के सपने को पूरा करने के लिए डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं। बता दें कि जयकिशोर प्रधान के अंदर आत्मविश्वास कूट कूटकर भरा हुआ है। उन्होंने एमबीबीएस करने के लिए ना केवल अपनी उम्र को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि एक कार हादसे में लगी बड़ी चोट को भी धत्ता बता दिया है। वर्ष 2003 में इस हादसे में उनका एक पैर पूरी तरह से खराब हो गया था। जिसके बाद पैर में लगी रॉड के सहारे ही वह चल फिर पाते हैं। इसके बावजूद उम्र के इस पड़ाव पर लोग जब रिटायरमेंट के बाद अपने जीवन को आराम से गुजारना चाहते हंै, उस वक्त श्री प्रधान ने अपनी जिदंगी को दोबारा से शुरू किया है।

बचपन में देखा था डाक्टर बनने का सपना

वह बताते हैं कि उन्होंने बचपन से ही डाक्टर बनने का सपना देखा था। एक बार उनके पिता बीमार हुए, तब वह उन्हें बुर्ला के सरकारी अस्पताल ले गए, मगर वह ठीक नहीं हुए। फिर वह उन्हें क्रिश्चियन अस्पताल ले गए, जहां वह ठीक होनकर घर आ गए। तब भी उनके मन में डाक्टर बनने का ख्याल आया था। परंतु तब तक इसके लिए उनकी उम्र सीमा पार हो चुकी थी। श्री प्रधान बताते हैं कि बेशक वह खुद डाक्टर नहीं बन पाए तो क्या हुआ, उन्होंने अपनी दोनों जुड़वा बेटियों को डाक्टरी की पढ़ाई करवाई। वह दोनों ही डेंटल मेडीकल की पढ़ाई कर डाक्टर बनीं। उनकी दोनों बेटिया भी चाहती थी कि वह भी डाक्टर की पढ़ाई करें।

इस तरह से पास की नीट की परीक्षा

श्री प्रधान बताते हैं कि 2019 में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नीट आयु सीमा को अगले फैसले तक हटा दिया था। यह देखकर उनकी बेटियों ने उन्हें प्रेरित किया कि वह एमबीबीएस की परीक्षा दें। इस पर उन्होंने नीट की परीक्षा दी, हालांकि इसमें वह पहली बार सफल नहीं हुए। मगर इसका लाभ उन्हें जरूर हुआ और वह इस परीक्षा के सभी तरीके जान गए। दोबारा से जब उन्होंने नीट की परीक्षा दी तो वह पास हो गए।

नीट परीक्षा देने के बाद हुई एक बेटी की मौत

लेकिन इस दौरान श्री प्रधान के घर में एक बड़ा हादसा भी हो गया। नीट की परीक्षा देने के एक महीन बाद दिसंबर में उनकी एक बेटी की एक्सीडेंट में मौत हो गई। इस हादसे ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया। एमबीबीएस के लिए उसी बेटी ने ही उन्हें सबसे ज्यादा हौंसला दिया। बेटी के निधन के बाद जब उनका नीट रिजल्ट आया और वह पास हुए, तब उन्हें ऐसा लगा कि उनकी बेटी यह देखकर बहुत खुश होती।

मेडीकल कॉलेज में लिया एडमिशन

नीट परीक्षा क्लीयर होते ही अपने घर से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित बुर्ला स्थित सरकारी मेडीकल कॉलेज में उन्होंने दाखिला ले लिया। श्री प्रधान का कहना है कि वह अपनी बेटी का सपना जरूर पूरा करेंगे। उनका उददेश्य डाक्टरी कर पैसा कमाना नहीं है। इसके लिए उनकी पेंशन ही बहुत है। वह डाक्टरी के जरिए गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना चाहते हैं। यदि वह ऐसा कर पाए तो खुद को बहुत किस्मत वाला समझेंगे।

उम्र नहीं होती बाधा

श्री प्रधान ने एमबीबीएस में दाखिला लेकर यह साबित कर दिखाया है कि यदि किसी इंसान में कुछ करने का हौंसला, जज्बा और मेहनत करने की लगन हो तो वह किसी भी चुनौती को स्वीकार कर सकता है। इसके लिए उम्र की कोई बाधा उनके सामने नहीं आती।

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