Wednesday, May 19, 2021
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सलाम है इस शिक्षक को, हर रोज घोड़े पर बच्चों को पढ़ाने के लिए 18 किलोमीटर दूर जाते हैं वेंकटरमन

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गुरू और शिक्षक किसी की भी तकदीर बनाने में सक्षम माने जाते हैं। कहते हैं कि शिक्षक उस दीपक के समान होते हैं, जोकि खुद जलकर दूसरों को रोशनी देते हैं। ठीक इसी प्रकार से शिक्षक भी अपनी मेहनत के दम पर बच्चों को जीवन जीने की शैली व तरक्की का रास्ता दिखाते हैं। तभी कहते हैं कि गुरू और गोविंद दोऊ खड़े काके लगूं पाए, तब कहा जाता है कि सबसे पहले गुरू के पांव ही छूने चाहिएं। क्योंकि गुरू ही अपने बच्चों को शिक्षित कर देश व दुनिया में अपने परिवार का मान सम्मान बढ़ाने लायक बनाता है।

यह कहानी है जुझारू शिक्षक वेंकटरमन की
आज हम आपको ऐसे ही एक गुरू से अवगत करवाएंगे, जोकि तमाम कठिनाईयों के बावजूद बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे क्षेत्र में जाते हैं, जहां पैदल चलने का रास्ता तक नहीं है। उस गांव में सडक़ ना होने के चलते गुरूजी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए घोड़े पर जाते हैं। यह कहानी है विशाखापटनम के एक आदिवासी इलाके में स्थित स्कूल में पढ़ाने के लिए जाने वाले शिक्षक वेंकटरमन की। टीचर वेंकटरमन ने दो महीने पहले ही इस स्कूल में पढ़ाने की शुरूआत की है। इस गांव में जाने के लिए रास्ता तो खराब है ही साथ ही इस आधुनिक युग में आज भी यह क्षेत्र संचार सेवाओं से अछूता है। यही नहीं बल्कि गांव में यदि कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल की सेवा भी उपलब्ध नहीं है।

हर रोज जूझते हैं कठिनाईयों से
इसके बावजूद टीचर वेंकटरमन तमाम कठिनाईयों को भी झेलते हुए बच्चों को पढ़ाने के लिए वहां जाते हैं। गांव में स्कूल के कोई ईमारत तक नहीं है। जिसके चलते वेंकटरमन कभी बच्चों को चर्च में पढ़ाते हैं तो कभी किसी मकान में। टीचर वेंकटरमन की मेहनत और लगन को देखते हुए गांव वालों ने उन्हें एक घोडा गिफ्ट किया है। जिससे वह गांव में आकर बच्चों को शिक्षित करने के अभियान में जुटे हैं।

गांव वाले रखते हैं घोड़े का ख्याल
बता दें कि वेंकटरमन के इस घोड़े का ख्याल व उसके दाना पानी की व्यवस्था भी गांव वाले ही करते हैं। गांव के करीब 50 बच्चों को पढ़ाने के लिए हर रोज वेंकटरमन 18 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। यह रास्ता इतना दुर्गम है कि यदि कोई परेशानी भी हो जाए तो सहायता के लिए भी दूर दूर तक कोई नहीं मिलता। इसके बावजूद वेंकटरमन इस कड़ी चुनौती को स्वीकार कर हर रोज गांव में जाकर बच्चों को पढ़ाने का पुनीत कार्य कर रहे हैं।

सलाम है वेंकटरनम को
टीचर वेंकटरमन की इस मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि गांव के लोग उनका भरपूर आदर सत्कार करते हैं। सिटीमेल न्यूज भी वेंकटरमन के हौंसले और जज्बात को सलाम करता है। आज के इस युग में ऐसे बहुत से टीचर हैं, जोकि बच्चों को मानवता की वजह से नहीं बल्कि मोटी फीस की वजह से पढ़ाते हैं। इसलिए इस युग में वेंकटरमन जैसे टीचर किसी देवदूत से कम नहीं कहे जा सकते।

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