Saturday, November 27, 2021
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संघर्ष, हिम्मत और जज्बा कोई इनसे सीखे, बेटियों को पढ़ाने की खातिर रेखा बन गई देश की इकलौती मछुआरिन,

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मां तो मां होती है, जोकि अपने बच्चों के लिए खुद की जान को भी जोखिम में डालने से नहीं घबराती। मां अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकती है। ऐसी एक मां से आज हम आपको रूबरू करवा रहे हैं, जिन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई और परिवार को चलाने के लिए उफान मारती लहरों के बीच जाकर समुंद्र में मछली पकडऩे का काम शुरू कर दिया। यह कहानी है के.सी.रेखा की, जोकि आज अपने इसी मजबूत इरादों के दम पर देश की पहली लाईसेंस प्राप्त मछुआरिन बन गई हैं।

सुनामी के साथ रेखा की किस्मत भी बदल गई

रेखा की किस्मत ने उस समय मोड़ लिया, जब देश में सुनामी का दौर शुरू हुआ। जिस तरह से समुंद्र में सुनामी ने सब कुछ उथल पुथल कर दिया, ठीक उसी तरह से रेखा के परिवार में भी इसी प्रकार का दौर शुरू हो गया था। दरअसल रेखा के पति पी. कार्तिकेयन भी समुंद्र में मछली पकडऩे का काम करते हैं। मगर सुनामी के दौर में कार्तिकेयन के साथ काम करने वाले दोनों मजदूर डरकर भाग गए। इसके बाद कार्तिकेयन अकेले समुंद्र में नहीं जा सकते थे। मछली पकडऩे के काम में जाल और नाव को संभालने के लिए दो और लोगों की भी उन्हें जरूरत होती थी। इस तरह से रेखा और कार्तिकेयन के सामने परिवार को चलाने का संकट पैदा हो गया। उनके साथ अपनी दो बेटियों का भविष्य भी दांव पर था।

the hindu

भांपी पति की परेशानी और किया फैसला

तमाम प्रयास करने के बावजूद भी कार्तिकेयन को जब समुंद्र में जाने के लिए मजदूर नहीं मिले तो अपने पति की चिंता को भांपते हुए रेखा ने उनके साथ समुंद्र में जाने का फैसला कर लिया। रेखा को पता था कि यदि यह काम नहीं किया तो परिवार के साथ साथ उनकी बेटियों का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा। इस तरह से दोनों पति-पत्नी मिलकर समुंद्र की लहरों के बीच मछली पकडऩे के लिए जाने लगे। रेखा बताती हैं कि समुंद्र के अंदर जाकर एक डर का अहसास होता है। चारों तरफ केवल खतरा ही खतरा दिखाई देता है। मगर उन्होंने डर को छोडक़र अपने परिवार और बेटियों का भविष्य देखा। इस तरह से बिना रेखा ने यह बड़ा कदम उठाया।
रेखा को मिला लाईसेंस

हालांकि केरल व समुंद्री तटों के पास रहने वाले इलाकों में बहुत सी महिलाएं मछली पकडऩे का काम करती हैं। पंरतु उनमें से रेखा एक मात्र ऐसी महिला मछुआरिन हैं, जिन्हें केरल स्टेट फिशरीज विभाग ने डीप शि फिशिंग का लाईसेंस दिया है। इस लाईसेंस के मिलने के बाद रेखा देश की पहली लाईसेंस प्राप्त महिला मछुआरिन बन गई हैं। लाईसेंस मिलने के बाद 45 वर्षीय रेखा को प्रीमियर मरीन रिसर्च संस्थान ने सम्मानित भी किया है।

अरब सागर में पहुंच जाती है रेखा

केरल के थ्रिशूर जिले के गांव चवक्कड़ की रहने वाली रेखा अरब सागर में जाकर भी मछली पकडऩे का हुनर जानती हैं। उनके हौंसले, बहादुरी व जज्बे से इलाके के लोग बहुत प्रभावित हैं। हालांकि रेखा का परिवार भी इस काम में बहुत पहले से है, मगर उनके कभी भी समुंद्र में जाने की नौबत नहीं आई थी। पंरतु जब परिवार पर संकट आया तो उन्होंने अपनी जान को ताक पर रखकर पति का सहयोग करना उचित समझा। समुंद्र में जाने से पहले रेखा हर रोज कदल्लमा देवी की पूजा जरूर करती हैं। कदल्लमा देवी को समुंद्र की देवी माना जाता है। इसलिए रेखा हर रोज उनका आर्शीवाद और पूजा करने के बाद ही नाव को समुंद्र में ले जाती है।

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