Friday, January 22, 2021
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टीचर के बेटे ने किया कमाल, अपनी मेहनत से खड़ी कर दी 21000 करोड़ की कंपनी, फिल्म हीरोईन से की शादी

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

कठिन मेहनत और लगन से बड़ी से बड़ी कामयाबी को हासिल किया जा सकता है। एक टीचर के बेटे ने अपनी निष्ठा व दिन रात के परिश्रम से यह साबित कर दिखाया है। यह कहानी है राहुल शर्मा नाम के उस युवक की, जिसने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर ऐसा अजूबा कर दिखाया, जोकि अधिकांश तौर पर फिल्मों में ही देखने को मिलता है। इस युवक ने वक्त की नब्ज को पहचाना और खड़ी कर दी 21000 करोड़ रुपए की मोबाईल कंपनी।

फिल्मी नहीं हकीकत है ये कहानी

जी हां यह कोई फिल्मी फसाना नहीं है, बल्कि हकीकत कहानी है राहुल शर्मा नाम के उस युवक की, जोकि आज माईक्रोमैक्स कंपनी के मालिक है। इस युवक की कहानी बेशक फिल्मी पर्दे जैसी है, मगर इसके पीछे उनकी मेहनत व परिश्रम को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। राहुल शर्मा की पत्नी भी एक जानी मानी फिल्म अभिनेत्री आसीन हैं, जिन्होंने अभिनेता आमिर खान के साथ भी फिल्म में काम किया है ।

स्कूल टीचर थे राहुल शर्मा के पिता

राहुल शर्मा का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक टीचर थे। राहुल अपने परिवार के साथ टीचर्स कालोनी में ही रहते थे। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार राहुल को बचपन से ही मशीनरी से प्यार था, इसके चलते ही उन्होंने इस टे्रड में पढ़ाई भी की थी। इसके बाद उन्होंने एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में कुछ साल तक जॉब की। इसके बाद राहुल को लगा कि उन्हें अब नौकरी की बजाए खुद का बिजनेस करना चाहिए। फिर उन्होंने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर 2003 में माईक्रोमैक्स नाम से साफ्टवेयर कंपनी की स्थापना कर दी। शुरू में तो उन्होंने इस कंपनी को साफ्टवेयर कंपनी के तौर पर ही चलाया, लेकिन जल्द ही उन्होंने फिक्स फोन बेचने भी शुरू कर दिए। धीरे धीरे कारोबार बढ़ाते हुए माईक्रोमैक्स ने नोकिया और एयरटेल के साथ भी व्यापार करना शुरू कर दिया।

लंबी बैटरी वाला फोन बनाने का आया ख्याल

एक बार राहुल शर्मा अपने बिजनेस को लेकर पश्चिम बंगाल गए थे। वहां उन्होंने देखा कि कैसे लोग पीसीओ (पब्लिक टेलीफोन बूथ) पर बिजली की कमी की वजह से ट्रक की बैटरी से चार्जिंग कर रहे हैं। यह वाक्या वर्ष 2007 का है, इसे देखकर राहुल शर्मा ने सोचा कि क्यों ना ऐसा मोबाईल फोन बनाया जाए, जोकि ना केवल लंबी बैटरी वाला हो, बल्कि सस्ता भी हो। यह सोचकर उन्होंने माइक्रोमैक्स कंपनी के बैनर तले ही सस्ता व लंबे समय तक चलने वाले मोबाईल फोन लांच करने की पूरी प्लानिंग तैयार कर दी। हैरत की बात है कि उस समय यह फोन हर आदमी की जरूरत बन गया था। लोग लंबी बैटरी व सस्ता होने की वजह से माइक्रोमैक्स फोन पर निर्भर रहने लगे थे।

गांवों में बिके दस हजार फोन

फोन लांच होने के बाद ग्रामीण इलाकों में इसकी डिमांड इतनी बढ़ गई थी कि दस दिनों के भीतर ही गांवों में दस हजार फोन बेचे गए थे। वर्ष 2014 में तो माईक्रोमैक्स ने नोकिया जैसी कंपनी को भी पछाड़ दिया था और फोन की बिक्री में उससे आगे निकल गई थी। उस वक्त ऐसा समय आया कि भारत में यह सबसे बड़ी मोबाईल कंपनी बनकर सामने आ गई।

रूस में भी किया कंपनी का विस्तार

माईक्रोमैक्स की लोकप्रियता का आलम यह रहा कि उसने रूस में भी अपने फोन बेचने शुरू कर दिए। रूस में इस कंपनी का हिस्सा पांच प्रतिशत तक पहुंच गया। यह कंपनी तेजी से विस्तार करते हुए अन्य इलेक्ट्रिक उत्पाद भी बना रही है। फिलहाल यह कंपनी अफ्रीकी देशों के साथ साथ मध्य पूर्व के देशों में भी अपनी पकड़ और विस्तार करने में जुटी है। नेपाल, श्रीलंका और बांगलादेश सहित भारत के कई राज्यों में माईक्रोमैक्स के उत्पादों की खूब बिक्री होती है।

ई-बाईक के कारोबार में भी उतरी माईक्रोमैक्स

अब यह कंपनी ई-बाईक के क्षेत्र में भी कूद गई है। कहने का तात्पर्य यह है कि एक सादगी व मध्यवर्गीय परिवार के लडक़े ने अपनी मेहनत और सूझबूझ के बल पर देश की जानी मानी कंपनी खड़ी कर विश्व के कई देशों में भारत का नाम रोशन किया है। बताया गया है कि आज यह कंपनी 21 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक का कारोबार करने वाली कंपनी बन गई है।

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