Wednesday, April 21, 2021
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दिल्ली का वह बच्चा, जो समझता है चिडिय़ों की भाषा, दिन भर करता हैं उनके साथ गुफ्तगूं

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

इस बच्चे में पक्षियों के प्रति ऐसी दीवानगी है कि वह अपना पूरा दिन उनकी सेवा में बिता देता है। वह खुद ही इस काम को नहीं करता, बल्कि और बच्चों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनकर उन्हें इस नेक काम के प्रति प्रेरित करता है। इस 18 साल के बच्चे का नाम अमन शर्मा, जोकि सबसे कम उम्र का पर्यावरणविद बनकर प्यारे पक्षियों को सुरक्षित करने का अभियान चलाए हुए है।

aman sharma

अमन समझता है चिडिय़ों की भाषा

इस बच्चे की दीवानगी का आलम ये है कि वह अब चिडिय़ों से भी बात करता है। उनके हावभाव और भाषा को समझता है। दिन भर उनकी सेवा करता है और उनके घौंसले में रखे अंड़ों की सुरक्षा भी करता है। दिल्ली निवासी अमन शर्मा को जब भी समय मिलता है, वह पक्षियों की देखभाल में जुट जाता है। उन्होंने अपनी उम्र के ही बच्चों के साथ एक क्लब की भी स्थापना की है ,जिसका नाम Cuckoo About Nature कूको एबाऊट नेचर है। इस क्लब के जरिए वह बच्चों के बीच पर्यावरण और पक्षियों के प्रति जागरूकता लाने का काम कर रहे हैं।

छुटटी के दिन नहीं मनाता पार्टी

खास बात तो ये है कि सप्ताह में अवकाश के दिन जब अमन के परिवार वाले किसी पार्टी में जाते हैं तो वह गुरूग्राम के पास सुल्तानपुर में पक्षियों के पास अपना दिन बिताने पहुंच जाते हैं। अमन का उददेश्य बच्चों को प्रकृति से परिचित करवाना है। उनका कहना है कि वह अपने क्लब के माध्यम से अपने उददेश्य में काफी हद तक सफल हो रहे हैं। उनका क्लब सुंदर व प्यारे पक्षियों तथा तितलियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसका लाभ ये हो रहा है कि वह लोग भी अपने आसपास रहने वालों के बीच इस ज्ञान को बांट रहे हैं।

बुलबुल ने बनाया था घोंसला

अमन शर्मा ने कहा कि लॉकडाऊन में जब सब कुछ बंद था। तब घरों के बाहर व पेड़ों पर इन सुंदर पक्षियों की चहचहाट और उनकी खूबसूरती के दीदार हुआ करते थे। अब से पहले प्रदूषण व दिल्ली की व्यवस्तता के बीच कभी किसी ने इन पक्षियों को देखा तक नहीं था। उनकी बॉलकानी में भी एक बुलबुल ने अपना घोंसला बना लिया था। उनकी मां ने जब उसे यह बताया तो वह बहुत खुश हुआ। उसने बुलबुल के घोंसले में तीन प्यारे अंडे देखे, संभवयत: वह बुलबुल के होने वाले बच्चे थे। अमन का कहना है कि प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है, मगर हमारा भी फर्ज है कि हम भी प्रकृति को सहेजकर रखें।

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