Friday, April 23, 2021
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कॉलेज ने नहीं दिया इंजीनियरिंग सार्टिफिकट, तो ये दलित लडक़ी फीस चुकाने के लिए करने लगी मजदूरी

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हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों ना हो, अगर मन में जज्बा और लगन है तो फिर कोई काम बड़ा-छोटा या फिर मुश्किल भरा नहीं होता। ऐसी ही एक दुखद और हैरान कर देने वाली कहानी है इंजीनियरिंग की स्टुडेंट और दलित लडक़ी रोजी की। यह दलित लडक़ी ओडिशा के पुरी जिले के अंतर्गत आने वाले गांव गोरडीपीढ़ की रहने वाली है। 22 साल की इस लडक़ी के पास बकाया फीस जमा करवाने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए उसने अपनी फीस चुकाने के लिए मजूदरी करने का रास्ता चुना। उसके माता पिता भी पेशे से मजदूर हैं, जबकि वह घर में पांच बहनें हैं । इससे उनकी माली हालत का आप बेहतर अंदाजा लगा सकते हैं।

COURTESY/SANDEEP SAHU

फीस नहीं चुकाई तो नहीं मिला सार्टिफिकेट

रोजी बेहेरा वर्ष 2019 में बरूनेई इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कर रही है। हालांकि उसकी पढ़ाई पूरी हो गई है, मगर हॉस्टल और कॉलेज की बकाया फीस 44000 है, वह उसका इंतजाम नहीं कर पा रही थी। माता पिता की स्थिति उसे पता है, इसलिए वह उनसे कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। फीस ना चुकाने पर कॉलेज ने प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया। हालांकि किसी तरह से उसने 20 हजार रुपए का इंतजाम तो कर लिया, मगर बाकि 24000 रुपए का प्रबंध नहीं हो पाया। इसलिए उसने अपनी दो और बहनों के साथ मनरेगा के तहत मजदूरी का काम शुरू कर दिया। इस काम की एवज में रोजी व उसकी बहनों को प्रतिदिन 207 रुपए की दिहाड़ी मिल पाती है।

मीडिया की खबर के बाद मिला सहयोग

पंरतु रोजी की यह दुखभरी कहानी मीडिया में आते ही लोगों ने उसे मदद पहुंचाना भी शुरू कर दिया। जिला प्रशासन ने अपनी ओर से रोजी को 30 हजार, चेन्नई के अशोक कुमार ने दस हजार और एक फिल्म अभिनेत्री रानी ने 25000 रुपए की मदद उसे भेज दी। बताया जाता है कि मदद करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश भी शामिल हैं। रोजी को जितने भी लोग मदद कर रहे हैं, फिलहाल वह उसकी जरूरत से अधिक है।

अधिक राशि आएगी इस काम

पंरतु रोजी सभी का आभार जताते हुए कहती है कि अधिक राशि मिलने के बाद वह सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक करना चाहती है। कई कॉलेज उसे स्कॉलरशिप भी दे सकते हैं। मगर वह किसी अच्छे संस्थान से बीटेक करना चाहती है। रोजी अपनी चार बहनों में वह सबसे बड़ी है, इसलिए उसकी जिम्मेदारियां भी बड़ी हैं। उसकी छोटी बहनें भी पढ़ाई कर कुछ बड़ा काम करना चाहती हैं, ताकि वह अपने माता पिता की जिम्मेदारियों को बोझ उठा सकें।

मजदूरी करने पर नहीं आई शर्म

इंजीनियरिंग करने के बाद मजदूरी करने के एक सवाल पर रोजी ने कहा कि कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। यह काम करते हुए उसे बिल्कुल शर्म नहीं आई। इस तरह से एक लडक़ी ने अपनी हिम्मत के बल पर खुद को साबित करके दिखाया है। रोजी की हिम्मत, जज्बे और कठोर परिश्रम को सिटीमेल न्यूज सलाम करता है।

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