Friday, April 23, 2021
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गोलियों से छलनी हो गया पूरा शरीर, फिर भी पाक सैनिकों के उड़ाए परखच्चे, इस तरह से योगेंद्र को मिला परमवीर चक्र

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शरीर में 15 गोलियां लगने के बाद भी योगेंद्र यादव ने अपनी वीरता और बहादुरी का परिचय देते हुए पाकिस्तान के सैनिकों के परखच्चे उड़ा दिए और अपने साथी सैनिकों की शहादत का बदला लिया। गोलियों से पूरा शरीर छलनी होने के बाद भी वह दुश्मनों से लड़ते रहे और अंत में अपना पूरा बदला लिया। योगेंद्र ने अपने पिता की राह पर चलते हुए सेना में शामिल होने का सपना देखा था। उनके पिता भी भारतीय सेना के वीर सिपाही थी, जिन्होंने भारत-पाक युद्व में अपनी वीरता के जौहर दिखाए थे। पिता की वर्दी देखकर ही योगेंद्र भारतीय सेना में शामिल हुए और सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र लेने वाले सैनिक का खिताब हासिल किया।

16 साल में सेना में भर्ती हुए योगेंद्र

वर्ष 1980 को यूपी के बुलंदशहर के गांव औरंगाबाद में पैदा हुए योगेंद्र यादव ने अपने पिता करण सिंह की भांति ही देश की सेवा करने की ठानी थी। महज 16 साल की उम्र में वह सेना में भर्ती हो गए थे। आर्मी में जाते ही 1999 में कारगिल युद्व का बिगुल बज गया। युद्व शुरू होते ही योगेंद्र को टाईगर हिल के तीन सबसे बड़े बंकरों पर काबिज होने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दिन 4 जुलाई थी और योगेंद्र अपनी कमांड प्लाटून के साथ इस काम को अंजाम देने के लिए आगे बढ़ गए थे। हालांकि यह आसान काम नहीं था और पहाड़ पर चढक़र उसे कब्जाना मुश्किल और जोखिम भरा था। मगर योगेंद्र ने अपने साथी सैनिकों के साथ इस काम को हाथ में लेकर उसे पूरा करने की ठान ली थी।

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पाक ने कर दिया था हमला

इस दौरान योगेंद्र की प्लाटून को पाक सैनिकों ने देख लिया और उन गोलियों की बरसात कर दी। लेकिन देश के वीर सैनिकों ने दोबारा से हिम्मत दिखाते हुए टाईगर हिल पर फिर चढ़ाई शुरू कर दी। इस दौरान उन्होंने सात पाक सैनिकों को भी मार गिराया और कुछ भागने में सफल रहे। इससे तिलमिलाए पाक सैनिकों ने भारी संख्या में योगेंद्र यादव की टुकडी पर हमला बोल दिया। जिसमें उसके सभी साथी शहीद हो गए और योगेंद्र को भी 15 गोलियां लगीं।

योगेंद्र ने इस तरह से दिखाई अपनी वीरता

यह देखकर खुश पाकिस्तान सैनिक जैसे ही जाने लगे तो योगेंद्र ने उन पर हैंड ग्रेनेड से हमला बोल दिया,जिसमें उनके चीथड़े उड़ गए। बचे हुए पाक सैनिकों को योगेंद्र ने गोलियों से भून दिया। इस तरह से अपनी वीरता दिखाते हुए योगेंद्र ने अपने साथियों की शहादत का बदला लिया। बाद में बेहोशी की हालत में योगेंद्र नीचे जा गिरे, जिन्हें उनके साथी बचाकर अस्पताल ले गए। इस तरह से योगेंद्र की जान को बचाया जा सका। इस वीरता के लिए योगेंद्र को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। योगेंद्र सिंह यादव की बहादुरी के किस्से आज भी सेना में सुनाए जाते हैं। योगेंद्र को एक बार फिर से Rank of Hony Lieutenant पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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