Monday, April 19, 2021
- Advertisement -

हिन्दुस्तान में है एक ऐसा अनोखा गांव, जहां होती है बड़े अफसरों की खेती, जानिए कितने IAS हैं यहां

Must Read

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...

अलग ही मिट्टी के बने तुषार, 17 साल तक असफलताओं से लड़े, अब बने जज

लोग दो या तीन साल की मेहनत के बाद सफल नहीं होते है तो वह टूट जाते है। लोग...

शहर घूमने सडक़ों पर निकला कोबरा तो रूक गया ट्रैफिक, घटना का वीडियो वायरल

वन्य जीवों के शहर में घूसने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। कभी तेंदुआ तो कभी कोई...
Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

उत्तर प्रदेश में एक ऐसा अनोखा गांव हैं, जहां बड़े-बड़े अफसरों की खेती होती है। कहने को तो यह छोटा सा गांव है, मगर इसमें पैदा केवल होनहार बच्चे ही होते हैं। मात्र 75 घरों वाले इस गांव में अधिकारियों की ऐसी पदाईश होती है, जिससे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। हम बात कर रहे हैं यूपी के माधोपट्टी गांव की। इस गांव में मात्र 75 घर हैं, लेकिन इन थोड़े से गांवों में ही 45 से 50 आईएएस अफसर हैं। छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले ये लोग आज देश के कई राज्यों में उच्च पदों पर आसीन हैं।

जौनपुर जिले में है ये शानदार गांव

उत्तरप्रदेश के जौनपुर जिले में आने वाले इस गांव को आज ऐसा गौरव हासिल है, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। इस गांव में आइएएस अफसर के साथ साथ पीसीएस अधिकारियों की संख्या भी उत्साहजनक है। इसके अलावा गांव के कई युवा और युवतियां भाभा संस्थान सहित विश्व बैंक में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

सबसे पहले आईएएस बनीं ये महान हस्तियां

बता दें कि इस गांव में पहले आईएएस अफसर के तौर पर मुस्तफा हुसैन का नाम बड़े आदर और गर्व के साथ लिया जाता है। श्री मुस्तफा हुसैन ने वर्ष 1914 में सिविल सर्विस पास की थी। उनके बाद वर्ष 1952 में इंदूप्रकाश सिंह आईएएस चुनकर आए। श्री सिंह ने सिविल सर्विस में दूसरी रैंक पास कर इतिहास बनाया था। इन दो लोगों के दिशा-निर्देश और मार्ग दर्शन में फिर इस गांव में अफसरों की खेती होने लगी। जिसे देखो वही आईएएस और दूसरी बड़ी सेवा में जाने की तैयारी करने लगा। गांव के युवक और युवतियों में पढ़ाई का ऐसा हौंसला दिखाई देने लगा कि उनमें बड़ा अफसर बनने की होड़ लग गई।

बच्चों को बचपन में ही दी जाती है प्रेरणा

मजे की बात तो यह है कि इस गांव में मां-बाप बचपन में ही अपने बच्चे को आईएएस बनने की प्रेरणा देना शुरू कर देते हैं। फिर हर घर में जब बच्चे अपने साथी को इस सेवा में जाने की तैयारी करते देखता है तो खुद भी उससे प्रेरित होकर इस काम में जुट जाता है। ठीक इसी प्रकार से इस गांव में बच्चे एक दूसरे को देखकर उच्च पदों पर आसीन होने की शिक्षा ग्रहण करता दिखाई देता है। इस गांव में अफसरों की इतनी भरमार है कि वहां पर लोगों को अक्सर सरकारी गाडिय़ों का काफिला आता जाता दिखाई देता है। ये बच्चे आज बड़े होकर अपने गांव में आना जाना नहीं भूलते, वह अपनी जन्म और कर्मभूमि को बहुत प्यार भी करते हैं।

एक घर में पांच लोग हैं आईएएस अफसर

इस गांव में एक घर ऐसा भी है, जहां चार सगे भाई और उनका बेटा आईएएस अफसर बनने का रिकार्ड बना चुके हैं। इनमें से सबसे पहले विनय कुमार सिंह ने वर्ष 1955 में 13 वीं रैंक से यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। बाद में वह बिहार के मुख्य सचिव के पद पर विराजमान हुए थे। इसके बाद उनके दो भाई क्षत्रपाल सिंह ओर अजय कुमार बड़े भाई के पदचिन्हों पर भी आईएएस अफसर बन गए। इनके बाद इसी घर से सबसे छोटे भाई शशिकांत भी आईएएस की परीक्षा पास करने में सफल रहे। हैरत की बात है कि इसी परिवार से शशिकांत सिंह के पुत्र यशस्वी सिंह भी यूपीएससी में 31 वां रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बने हैं।

दुनिया में परचम लहरा रहे हैं बच्चे

इस गांव में केवल आईएएस अफसर ही नहीं बनें, बल्कि कई युवाओं ने पीसीएस और विश्व बैंक जैसे दुनिया के सबसे बड़े संस्थान में कार्यरत होकर अपने परिवार व गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। अपनी मेहनत और निष्ठा से इस गांव के बच्चे आज देश और दुनिया में अपने परिवार के साथ साथ अपने देश हिन्दुस्तान का नाम भी रोशन कर रहे हैं।

- Advertisement -

Latest News

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -