Friday, April 16, 2021
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नेत्रहीन है यह शख्स फिर भी नहीं ली किसी की सहायता, केरल में 46 साल से चलाते हैं अपना स्टोर

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New Delhi: नेत्रहीन होने के बावजूद भी किसी की मदद न लेकर खुद के आत्मविश्वास व अपनी मेहनत के दम पर केरल में यह शख्स अपना स्टोर चला रहा है। इस शख्स का नाम है सुधाकर कुरुप। वह पिछले 46 वर्षों से स्टेशनरी की दुकान संचालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि स्टेशनरी पर आने वाले ग्राहकों के साथ वह खुद डील करते हंै। आइए जानते के इनके बारे में

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14 साल की उम्र में अहसास हुआ
स्टेशनरी की दुकान चलाने वाले सुधाकर जहब 14 साल के थे तो उन्हें आंखों से थोड़ा धुंधला दिखने लगा था। हालांकि फिर भी वह आम बच्चों की तरह काम कर रहे थे। हालांकि एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें दिखाई देना कम हो रहा है। 21 साल की उम्र में सुधाकर पूर्ण रूप से अपनी आंखे खो बैठे। हालांकि वह 9वीं क्लास तक पढ़ चुके थे।

जब डॉक्टरों ने कहा, आंखों का करना होगा ट्रांसप्लांट
परिजन आंखों के इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम के अस्पताल में सुधाकर को लेकर आए। यहां सुधाकर को तीन महीने तक रखा गया। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि अगर आंखों का ट्रांसप्लांट भी होता है तो वह नहीं देख पाऐंगे।

दुकान खोलने में पिता ने की मदद
सुधाकर बताते हैं कि उन्होंने परिजन को अपनी इच्छा के बारे में बताया था। परिजनों ने भी सुधाकर की मदद की। पिता के सहयोग से सुधाकर के लिए घर के पास ही दो कमरे की एक दुकान खोली गई। बताया जाता है कि वह खुद बाजार जाते हैं और सामान खरीद कर लाते हैं और दुकान में रखते हैं। दूसरे से मदद इसलिए नहीं लेते क्योंकि ग्राहक को देने के दौरान फिर उन्हें मालूम नहीं होगा कि सामान कहां रखा गया है।

क्या कहते हैं सुधाकर
सुधाकर बताते हैं कि वह पिछले 46 वर्षों से एक ही स्थान पर रहते हैं। वह कहते हैं कि भले ही मैं देख नहीं पाता हूं.। लेकिन मेरा मन सबकुछ देख पाता है। वह कहते हैं कि साल 2016 के दौरान उन्हें कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। जब उन्हें एक सप्ताह का समय लगा था, नए नोटो की लंबाई व चौड़ाई जानने में।

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