Tuesday, April 20, 2021
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आंध्रप्रदेश के इस शिक्षक ने उठाया जनजातीयों को शिक्षित करने का जिम्मा, सराहनीय कार्यों के लिए मिल चुके हैं अनेकों अवार्ड

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कहते हैं कि शिक्षक देश के भविष्य को संवारते हैं, शिक्षण ही देश की नींव को मजबूत करते हैं| परंतु वर्तमान में कई लोगों द्वारा शिक्षा को धंधा बना लिया गया है और शिक्षक भी इस धांधली में सहभागिता दिखाते हैं| लेकिन आज भी हमारे देश, हमारे समाज में ऐसे कई शिक्षक हैं जो देश के हित में कार्य करते हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिक्षित करने का प्रयास करते हैं| ऐसे ही एक शिक्षक की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं जिसने जनजातीयों को शिक्षित करने का जिम्मा उठाया है और उन्हें शिक्षित करने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहे हैं|

Newindianexpress

कडपा के रहने वाले हैं एसके दादा पीर

यह कहानी है एसके दादा पीर की जो आंध्रप्रदेश के कडपा के रहने वाले हैं| बता दें कि दादा पीर बहुत समय से ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं| दादा पीर पेशे से एक शिक्षक हैं और जनजतियों को शिक्षित करना उनका लक्ष्य है| जिसमें वह जनजतियों को वह आधार शिक्षा प्रदान करते हैं जिससे देश की साक्षारता दर में वृद्धि की जा सके|

रेड्डी कोट्टाला के स्कूल से शुरू हुआ यह काफिला

दरअसल दादा पीर 1986 से अध्यापन का कार्य कर रहे हैं| अपने शिक्षा देने के तरीके और मेहनत से दादा पीर अनेकों बार प्रमोशन ले चुके हैं| रेड्डी कोट्टाला के जिस स्कूल में दादा पीर पढ़ाते थे, उसी स्कूल में 2016 को उन्हें प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया| जब वह इस स्कूल में अध्यापक के तौर पर कार्यरत थे तभी से उन्होंने गौर किया कि जनजातीयों के बच्चे स्कूल नहीं आते और वह अपने अभिभावकों की सहायता के लिए स्कूल छोड़ देते हैं| तभी से दादा पीर ने जनजतियों को शिक्षित करने का लक्ष्य बनाया और उस पर काम करना शुरू कर दिया|

जिस दिन स्कूल देरी से आते थे उस दिन को दादा पीर छुट्टी मानते थे

बता दें कि अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए दादा पीर ने अपने मित्र के साथ मिलकर किताबें, पेन, स्लेट आदि इकट्ठा करना शुरू कर दिया और जनजनतियों को पढ़ाने का कार्य करने लगे| दादा पीर सबसे पहले स्कूल में आते हैं और सबसे बाद में स्कूल से जाते हैं और यदि जिस दिन दादा पीर को आने में देरी होती है वह उस दिन को छुट्टी में गिनते हैं| दादा पीर को अलग-अलग लोग आकर डोनेशन भी देते हैं जिसका प्रयोग वह जनजतियों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी करने में करते हैं|

सराहनीय कार्य के लिए मिल चुके हैं अनेकों अवार्ड

दादा पीर को उनके सराहनीय कार्यों के लिए अनेकों पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है| 2003 में दादा पीर को Best Teacher Award, 2008 में राज्य स्तर पर Best Teacher Award, 2011 में चेलिमी अवार्ड और 2013 में राष्ट्रीय स्तर पर Best Teacher Award से नवाजा जा चुका है| इसी के साथ-साथ सीएम पेशी भी दादा पीर के सराहनीय कार्यों की तारीफ कर चुके हैं|

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