Friday, January 22, 2021
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गर्भवती होने के साथ फूल टाइम जॉब करने वाली इस महिला ने पास की यूपीएससी परीक्षा

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New Delhi: यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान आपने कई छात्रों से सुना होगा कि इस परीक्षा को पास करने के लिए अपना पूरा समय देना होता है। साथ ही पूरी लगन के साथ मेहनत करनी होती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला से रु-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने उस वक्त यूपीएससी परीक्षा पास की.,जिस दौरान वह खुद पेट से थी और फूल टाइम जॉब भी कर रही थी। इस महिला की सक्सेस स्टोरी से उन लोगों को काफी सहारा मिलेगा, जो नौकरी करने के दौरान यूपीएससी की तैयारी करने की सोच रखते हैं। चलिए जानते हैं इस महिला के बारे में

महिला का नाम है पद्मिनी
पद्मिनी बताती हैं कि उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की है। उन्हें साल 2019 में 152वां रैंक मिला है। पद्मिनी उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक के रुप में सामने आई हैं, जिन्हें विवाह के बाद घरेलू कामकाजों में लगा दिया जाता है। इस वजह से न जाने कितनी ही महिलाओं का अपना करियर बनाने का सपना अधूरा रह जाता है।

ऐसे की परीक्षा की तैयारी
पद्मिनी ने अपने हाल में दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने इस परीक्षा को पास करने के लिए सबसे पहले टाइम मैनेजमेंट सेट किया। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी के लिए भी समय निकाला। पद्मिनी बताती हैं कि उन्हें नौकरी करने के दौरान स्टडी के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाता था। इसी वजह से वह अपने पहले प्रयास में फेल भी हुई थी।

सफलता के दो सूत्र
पद्मिनी सफलता के दो सूत्र बताती हैं कि पहला कि लिमिटेड रिसोर्स से पढ़ाई करना दूसरा मल्टीपल रिवीजन। वह कहती हैं कि उनके पास ज्यादा समय नहीं होता था, इसलिए वह एक विषय की एक ही किताब पढ़ती थी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ उन्होंने मॉक टेस्ट भी दिए।

मॉक टेस्ट को बताया जरूरी
पद्मिनी मॉक टेस्ट को बेहद ही जरूरी बताती हैं। वह कहती हैं कि जितना हो सके रिवीजन करना चाहिए। जिससे परीक्षा में आसानी से सफलता हासिल की जा सकती है।

ऑफिस से मिलता था ब्रेक, और चालू होती थी पढ़ाई
पद्मिनी बताती हैं कि जब भी ऑफिस में ब्रेक मिलता था, वह उस समय में किताबें पढ़ती थी। वह रोजाना सुबह उठकर पढ़ाई करती थी। ऑफिस से आने के बाद घर पर आने के बाद भी यही कार्य होता था।

ऑफिस की छुट्टी होती तो लाइब्रेरी जाती थी
पद्मिनी बताती हैं कि जिस दिन उनके ऑफिस से उन्हें छुट्टी मिलती थी, तो वह सुबह 9 बजे ही लाइब्रेरी चली जाती थी। जहां वह चैन से किताबें पढ़ पाती थी। हालांकि जब उनकी एक बार तबियत खराब हुई तो उन्होंने लाइब्रेरी जाना बंद कर दिया था।

 

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