Thursday, April 22, 2021
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ऐसा क्या हुआ था टाटा इंडिका कार लॉन्चिंग को लेकर जो रतन टाटा के सारे मित्र हो गए थे उनसे अलग, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

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जब आप कुछ अलग करना चाहते हैं तो इस मार्ग में अनेकों रुकावटें आती हैं लेकिन मंज़िल तक वही पहुंचता है जो इन रुकावटों को अपनी ताकत बना ले| ऐसा ही कुछ देश के जाने माने उद्योगपति रतन टाटा के साथ भी हुआ, जब उन्होंने भारत की पहली स्वदेशी कार को लॉन्च करने का फैसला किया| इस मार्ग में रतन टाटा के सामने अनेकों रुकावटें आईं लेकिन रतन टाटा ने कभी हार नहीं मानी और देश की पहली स्वदेशी कार इंडिका को लॉन्च किया|

instagram/ratantata

इंडिका की लॉन्चिंग के कारण रतन टाटा के मित्र हो गए थे उनसे अलग

दरअसल रतन टाटा ने भारत की पहली स्वदेशी कार को लॉन्च करने का फैसला लिया था| वह इस कार को पूर्णत: भारत में बनाना चाहते थे| गाड़ी के छोटे से बड़े हरेक पुर्जे को रतन टाटा भारत में बना रहे थे| लेकिन इस प्रयास में सफलता हासिल होगी या नहीं इस बात की कोई गारंटी नहीं थी| इसलिए रतन टाटा के मित्रों ने उनसे दूरी बना ली थी क्यूंकि उनके मित्रों को लगता था कि रतन टाटा का यह विचार नाकाम हो जाएगा| इसलिए जब इस कार की लॉन्चिंग हुई तो रतन टाटा खुद को अकेला महसूस कर रहे थे|

इंडिका ने भारत में जमाया अपना सिक्का और कर दी सबकी बोलती बंद

उसके बाद रतन टाटा ने अकेले ही इस प्रोजेक्ट पर काम किया और 1998 तक उन्होंने अपना यह प्रोजेक्ट पूरा किया| प्रोजेक्ट पूरा होने के 1 साल बाद ही टाटा इंडिका को लॉन्च किया गया और अपनी लॉन्च के कुछ दिन बाद ही टाटा इंडिका ने सफलता को हासिल करना शुरू कर दिया| धीरे धीरे इंडिका लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाती चली गई| लेकिन 2018 में इसका उत्पादन बंद कर दिया गया| एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2018 में टाटा इंडिका की करीब ढाई हज़ार यूनिट बाज़ार में बिकी थी|

पूर्ण रूप से स्वदेशी गाड़ी है टाटा इंडिका

बता दें कि टाटा इंडिका पूरी तरह से स्वदेशी गाड़ी है| गाड़ी के सभी पुर्जे भारत में ही बनाए गए हैं| यह भारत की पहली स्वदेशी गाड़ी है| जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था| रतन टाटा के इस फैसले को कई लोगों ने गलत समझा लेकिन आज इस गाड़ी की सफलता ने उन सभी को करारा जवाब दे दिया है जो इस फैंसले को गलत मानते थे|

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