Friday, April 23, 2021
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कलेक्टर कैसा होता है, इसी धुन में खेतीबाड़ी करने वाला युवक यूपीएससी टॉप कर बन गया आईएएस अधिकारी

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यदि कोई यह ठान ले कि उसे अपनी मंजिल को पाना है, तो वह सफल जरूर होता है। रवि कुमार सिहाग ऐसे ही एक कैंडिडेटस हैं, जोकि कभी अपने परिवार के साथ खेतीबाड़ी करते थे। खेतीबाड़ी के दौरान जब भी उन्हें किसी समस्या का सामना करना पड़ता तो लोग कहते थे कि कलेक्टर के पास जाओ। वही सभी समस्याओं का समाधान करेंगे। खेती और सिंचाई की समस्या को लेकर हर कोई कलेक्टर के ही गुणगान गाता दिखाई देता था। जिसे देखो वही कहता था कि कलेक्टर आफिस जाओ, हर परेशानी का अंत वहीं होता है। यह सुन सुनकर रवि के कान पक गए थे। तब वह ये जानने के लिए बेहद उत्सुक हो गए कि आखिर कलेक्टर के पास इतनी पावर कहां से आती है। यह जानने के लिए उनमें कलेक्टर के तमाम कार्य जानने की उत्सुकता बढ़ती गई और यह उत्सुकता इतनी बढ़ी कि वह यूपीएससी की परीक्षा तक पहुंच गए।

इस तरह से शुरू हुआ आईएएस बनने का सफर

इस तरह से रवि कुमार सिहाग का यूपीएससी पास करने से लेकर आईएएस अधिकारी बनने का सफर शुरू हुआ। रवि के परिवार में किसी की भी ऐसी पृष्ठभूमि नहीं थी कि इस सरकारी कामकाज को लेकर उन्हें कोई अधिक जानकारी हो। उनका परिवार सीधा सादा खेतीबाड़ी के काम से ही जुड़ा हुआ था। इसलिए रवि सिहाग भी अपने परिवार के साथ रहकर इसी काम को कर रहे थे। मगर कलेक्टर की पावर जानने की वजह से वह खुद कलेक्टर की पोस्ट तक पहुंच गए।

हिन्दी मीडियम चुना और टॉप कर लिया

रवि ने हिन्दी मीडियम को इस मुकाम तक पहुंचने का जरिया चुना। देखते ही देखते उन्होंने वर्ष 2018 में हिन्दी माध्यम से यूपीएससी की परीक्षा दी और पहली बार में ही टॉप कर दिखाया। दिल्ली नॉलेज टे्रक को दिए गए इंटरव्यू में रवि ने बताया कि उनका कोई ऐसा बैकग्राऊंड नहीं था, जिससे प्रभावित होकर वह आईएएस अधिकारी बनते। वह अचानक से कलेक्टर के बारे में खोजबीन करते हुए यूपीएससी तक पहुंच गए।रवि कुमार सिहाग ने एनसीईआरटी की किताबों को यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए सबसे बढिय़ा तरीका बताया। रवि के अनुसार पहले कैंडिडेटस को यह पता कर लेना चाहिए कि जिस परीक्षा में आप बैठ रहे हैं, आखिर उस परीक्षा की जरूरत क्या है। जब यह अच्छी तरह से समझ जाओ, तभी इस फील्ड में आओ। अन्य सफल प्रतिभागी की तर्ज पर उन्होंने भी केवल यही टिप्स दिए कि काफी सारी किताब पढऩे की बजाए एक किताब को ही अधिक बार पढऩा चाहिए।

हिन्दी या अंग्रेजी मीडियम हो, कोई फर्क नहीं

रवि ने बताया कि हिन्दी विषय को लेकर वह अधिक आत्मविश्वासी नहीं थे और वैसे भी इससे कोई फर्क नहीं पढ़ता कि आप किस विषय से यूपीएससी कर रहे हैं। फर्क केवल इस बात का पड़ता है कि आपकी तैयारी कितनी बेहतर है। हिन्दी विषय को चुनने के लिए उन्होंने खूब पढ़ाई भी की है। इसके परिणाम स्वरूप वह यूपीएससी के प्रत्येक टेस्ट में बेहतर करते गए और एक टॉपर बनकर इस कड़ी परीक्षा को पास किया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में इस परीक्षा को पास करने के साथ साथ आपका अंग्रेजी का भी अच्छा खासा ज्ञान होना चाहिए। अंग्रेजी सीखना भी बहुत जरूरी है , इसे आप अनदेखा नहीं कर सकते।

इतनी कठिन नहीं है ये परीक्षा

रवि ने कहा कि लोग इस परीक्षा को बेहद कठिन मानते हैं, मगर उनका कहना है कि जितना इसके कठिन होने का प्रचार किया गया है, उतनी कठिन ये है नहीं। इसके लिए आपकी तैयारी पूरी है तो आप पहली बार में ही इसे पास कर सकते हैं। उनका इस संदर्भ में कोई बैकग्राऊंड ना होने वजह बावजूद वह पहली बार में ही इसे पास करके यह साबित कर चुके हैं। इसलिए आप यदि सफल नहीं हो पा रहे हैं तो कमी आपकी तैयारी में है, ना कि यूपीएससी की परीक्षा में।

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