Sunday, January 24, 2021
- Advertisement -

राजस्थान के इस गांव में बेटी ने जन्म लिया तो , माता पिता लगाते हैं 111 पौधे , मनाया जाता है उत्सव

Must Read

किसी मसीहा से कम नहीं हैं दिव्यांग राधेश्याम, मगर हौंसला ऐसा कि बड़े से बड़ा दानवीर भी उनके सामने है बौना

दिव्यांग शब्द कैसे पड़ा, शायद बहुत से लोगों को इसकी जानकारी नहीं होगी। आपको बताते हैं कि विकलांग शब्द...

सडक़ हादसे रोकने का जुनून, पति राघवेंद्र ने घर और पत्नी ने जेवर बेच दिए, 48000 लोगों को बांट चुके हैं मुफ्त हेलमेट

दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद करने के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे। क्या कभी आपने यह सुना है...

इस महिला ने सोहराई और मधुबनी कला के माध्यम से बनाई खुद की पहचान, विदेशों में भी लहराया भारतीय कला का परचम

वर्तमान समय में देखा जाता है कि ज़्यादातर लोग पश्चिमी सभ्यता से आकर्षित हो रहे हैं जिसके कारण वह...

New Delhi: बेटियों के जन्म पर मायूस होने वाले अभिवावकों की कमी नहीं है। हमारे समाज में संकुचित मानसिकता के लोग भी हैं जो आज भी बेटी व बेटों में फर्क करते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि आज के समय में बेटियां बेटों की तुलना में अधिक नाम कमा रही हैं। फिर भी भेदभाव का दौर जारी है। बहरहाल आज उन अभिवावकों के लिए हम एक ऐसी स्टोरी लेकर आए हैं, जिसे पढऩे के बाद शायद मानसिकता में बदलाव आए। बात एक ऐसी गांव की जहां पर बेटी के जन्म लेने पर परिजनों के द्वारा 111 पौधे लगाए जाते हैं और धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस बारे में

the logically

साल 2006 से चली आ रही है परंपरा
राजस्थान के राजसमन्द जिले के पिपलांन्नी गांव में बेटी के जन्म लेने पर परिजनों के द्वारा 111 पौधे लगाए जाते हैं। साथ ही परिजन अपनी खुशी को भी जाहिर करते हैं। बताया जा रहा है कि यह परंपरा साल 2006 से चली आ रही है। गांव की जनसंख्या 8 हजार है।

गांव में लगाए गए ढाई लाख पौधे
बताया जा रहा है कि इस गांव में अब तक ढाई लाख पौधे लगाए गए हैं। और प्रतिवर्ष इस गांव में 60 के लगभग लड़कियों का जन्म होता है। बताया जा रहा है कि गांव में नीम, आम, शीशम सहित कई तरह के पौधे लगाए गए हैं।

परंपरा की शुरुआत पूर्व सरपंच ने की थी
बताया जा रहा है कि यह परंपरा गांव के पूर्व सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल ने शुरु की थी। सरपंच ने अपनी बेटी की याद में पौधे लगाए थे। वह गांव की बेटियों की उज्जवल भविष्य के लिए 21 हजार रुपये भी देते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जब भी इस गांव में बेटी का जन्म होता है तो परिवार के लोग 10 हजार रुपये व पूर्व सरपंच के द्वारा दिए गए 21 हजार को जोडक़र कुल 31 हजार रुपये बेटी के लिए फिक्स किया जाता है। बताते चले कि गांव के लोग बेटियों की तरह ही पौधे की रखवाली करते हैं।

अधिक पौधे लगाने से वातावरण भी साफ रहता है
पिछले 14 साल से इस गांव में पौधे लगाने का कार्यक्रम चल रहा है। जिसकी वजह से गांव में वातावरण भी साफ रहता है, साथ ही लोगों को साफ हवा मिलती है।

- Advertisement -

Latest News

किसी मसीहा से कम नहीं हैं दिव्यांग राधेश्याम, मगर हौंसला ऐसा कि बड़े से बड़ा दानवीर भी उनके सामने है बौना

दिव्यांग शब्द कैसे पड़ा, शायद बहुत से लोगों को इसकी जानकारी नहीं होगी। आपको बताते हैं कि विकलांग शब्द...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -
Do NOT follow this link or you will be banned from the site!