Wednesday, April 21, 2021
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पिता को सरकारी दफ्तर में धक्के खाते देखा तो नन्ही बेटी को हुई पीड़ा, फिर खुद ही बन गई कलेक्टर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

सरकारी दफ्तरों को सुधारने के चाहे कितने ही दावे किए जाएं, मगर वहां का ढर्रा ऐसे ही रहेगा। लोगों को सरकारी दफ्तरों में अपने जूते घिसने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे ही मामले में जब एक बेटी ने अपने पिता को सरकारी काम करवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटते और उनकी जी हजूरी करते देखा तो उसने ठान लिया कि वह एक दिन कलैक्टर बनकर रहेगी । उसकी इसी सोच व लोगों का बुरा हाल देखकर इस लडक़ी ने ना केवल आईएएस बनकर दिखाया, बल्कि आज कलेक्टर बनकर लोगों की सेवा कर रही है।

पिता को करवाने थे कलेक्टर के साईन

यह कहानी है महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव उपलाई में रहने वाली रोहिणी की। रोहिणी का यह गांव सोलापुर जिले के अंतर्गत पड़ता है। रोहिणी के पिता एक किसान हैं और खेतबाड़ी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। एक बार राज्य को किसान योजना के तहत लाभ दिया गया। इसके लिए ही रोहिणी के पिता सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा उनके लाभ पत्र पर साईन नहीं हो पा रहे थे।

छोटी से बच्ची ने पूछी पापा की परेशानी

अपने पिता को परेशान देखकर 9 साल की रोहिणी ने जब उनसे पूछा तो पता चला कि कलेक्टर के साईन करवाने के लिए उनके पिता को अपने जूते घिसने पड़ रहे हैं। तब रोहिणी ने ठाना कि वह बड़ी होकर कलेक्टर बनेंगी। अपनी इसी धारणा को साकार करने के लिए 23 साल बाद रोहिणी ने पढ़ लिखकर पहले इंजीनियरिंग की और इसके बाद बिना कोचिंग के ही यूपीएससी की परीक्षा दी। इसमें वह सफल रही और अपने दम पर आईएएस अधिकारी बनकर दिखाया।

सैंकड़ों पुरूषों के बीच बनीं पहली महिला कलेक्टर

बाद में रोहिणी को तमिलनाडू राज्य में सैंकड़ों पुरूषों के बीच में से पहली महिला कलेक्टर बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इस तरह से उसने अपने पिता की दुर्दशा के बाद जो सपना देखा था, उसे साकार कर दिखाया। रोहिणी बताती है कि जब वह प्रशिक्षण के लिए जा रही थी, तब उनके पिता ने यह सीख दी थी कि बेटा तुम्हारी टेबल पर फाईलों का ढेर आएगा, मगर उन फाईलों में लाखों लोगों का जीवन सुधारने की योजना भी होंगी। इसलिए जनहित के काम करने में कभी भी पीछे मत रहना। इस सीख के बाद रोहिणी ने जब अपना कार्यभार संभाला तो उसके बाद लोगों के कार्य करने के लिए उन्होंने शुरूआत की, जोकि आज भी निरंतर जारी है।

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