Friday, May 14, 2021
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जानेें आखिर रतन टाटा की पूजा क्यों करते हैं लोग, कौन सी बातें हैं जो उन्हें बनाती हैं दूसरों से महान

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देश के अग्रणी उद्योग टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन एवं टाटा ट्रस्ट के मौजूदा चेयरमैन रतन टाटा मानवहित की सोच व लोगों के साथ मिलनसार व्यवहार की वजह से ही आज वह दुनिया भर में भी अपनी विशेष पहचान रखते हैं। उनके इसी व्यवहार के चलते लोग उनकी पूजा भी करते हैं। उनके अंदर का व्यक्तित्व इतना शानदार है कि लोग उनके कायल हैं। बिजनेस के आसमान पर होने के बावजूद श्री टाटा हमेशा जमीन से जुड़े रहते हैं। उनका दयालुपन ही उन्हें दूसरों से अलग और शिखर पर रखता है।

इन्हीं खूबियों की वजह से हैं वो औरों से अलग
श्री टाटा अपनी इन्हीं खूबियों की वजह से देश और दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं। उनकी ऐसी ही अनेक खासियत हैं, जिनकी वजह से वह लोगों के दिलों पर राज करते हैं। आईए जानते हैं कि उनकी वह प्रमुख बातें, जिनकी वजह से लोग उनकी इज्जत तो करते ही हैं, साथ ही उन्हें पूजते भी हैं।

इंस्टाग्राम पर जमीन पर बैठा हुआ फोटो छा गया
इंस्टाग्राम के जरिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले रतन टाटा के फ्लोअर की संख्या लाखों में है। श्री टाटा जब इंस्टाग्राम से जुड़े तो उनका जमीन पर बैठे हुए एक फोटो सोशल मीडिया पर छा गया। बिजनेस की दुनिया में आसमान पर रहने वाले रतन टाटा को जमीन पर बैठा हुआ देखकर उनके फॉलोअर ने उन्हेंं खूब लाईक किया। मगर इस दौरान एक महिला ने उन्हें छोटू कहकर क्या संबोधित किया कि श्री टाटा के फॉलोअर ने इस महिला को ट्रोल करना शुरू कर दिया। रतन टाटा ने यह देखकर उस महिला का ना केवल बचाव किया, बल्कि उसकी भावनओं का भी सम्मान किया। इसके बाद लोगों ने इस महिला को माफ किया।

रतन टाटा ने दान में दिए 1500 करोड़ रुपए
रतन टाटा का दिल अपने देश के लिए धडक़ता है। वह मानते हैं कि जिस देश ने उन्हें इतना मान सम्मान और शोहरत दी है तो वह भी उसके प्रति अपना कुछ हक अदा कर सकते हैं। इसके चलते ही जब देश कोरोना संकट से जूझ रहा था, तब श्री टाटा ने सबसे पहले आगे आते हुए केंद्र सरकार को 1500 करोड़ रुपए का दान देकर अपना फर्ज निभाया था। इसके चलते पूरी दुनिया में रतन टाटा की लोगों ने जमकर प्रशंसा की थी।

लॉकडाऊन में उद्योगों को दिखाया था आईना
लॉकडाऊन में संकट से जूझ रहे बड़े बड़े उद्योगों को रतन टाटा ने उस समय आईना दिखाया था, जब वह मुनाफा कमाने के चक्कर में अपने श्रमिकों को नौकरी से हटा रहे थे। तब रतन टाटा ने सोशल मीडिया के जरिए उन उद्योगों को आईना दिखाते हुए लिखा था कि जब ये श्रमिक किसी भी उद्योग को बड़ा करने के लिए अपना खून पसीना लगा देते हैं तो ऐसे संकट के समय उन मजदूर व श्रमिकों को हटाना न्यायसंगत नहीं है, वह भी केवल मुनाफे के लिए। उन्होंने उन सभी को नैतिकता का पाठ पढ़ाया था। बता दें कि टाटा समूह द्वारा लॉकडाऊन और कोरोना के चलते किसी भी श्रमिक को नौकरी से नहीं हटाया था।

लावारिस जानवरों के लिए धडक़ता है दिल
सडक़ पर आवारा व लावारिस हालत में पड़े जानवरों के लिए भी रतन टाटा के दिल में खास प्रेम है। सडक़ पर एक्सीडेंट होने वाले आवारा पशुओं के लिए रतन टाटा ने एक एनजीओ के साथ मिलकर उनके गले में रेडियम बेल्ट पहनाने का अभियान चलाया था। ताकि रात के अंधेरे में लोग उन्हें आसानी से देख सकें। इसके साथ साथ सडक़ पर घायल हुए कुत्तों को भी वह गोद लेने की अपील करते हैं। श्री टाटा भी ऐसे जानवरों की मदद करना अपना दायित्व समझते हैं।

एक बीमार कर्मचारी के घर पहुंच गए थे टाटा
अपनी कंपनी में सालों तक काम करने वाले एक कर्मचारी के बारे में जब रतन टाटा को पता चला कि वह बीमार हैं तो उन्हें देखने के लिए वह पुणे तक पहुंच गए थे। यह कर्मचारी फिलहाल रिटायर होकर अपने घर पर ईलाज करवा रहे हैं। यह मानवता की जीती जागती मिसाल ही कही जाएगी। श्री टाटा को अपने घर आया देखकर कर्मचारी व उनके परिवार की आंखों में आंसू आ गए थे।
26/11 हादसे के कर्मचारियों की मदद की
मुंबई में टाटा समूह के होटल ताज में जब 26/11 का हमला हुआ था तो उनके होटल में काम करने वाले कई कर्मचारी उसमें प्रभावित भी हुए थे। इस हमले में जितने भी कर्मचारी घायल हुए, उन सभी की मदद करते हुए उन्होंने ना केवल ठीक होने तक उन्हें पूरा वेतन दिया था, बल्कि इस हमले में मारे गए कर्मचारियों के परिवार की आर्थिक मदद करते हुए उनके बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया था।

कुपोषण के खिलाफ चलाया अभियान
रतन टाटा ने देश में कुपोषण की गंभीर बीमारी के खिलाफ भी अभियान चलाने में संयुक्त राष्ट्र की भरपूर मदद की है। उन्होंने देश के करीब एक दर्जन राज्यों में कुपोषण के खिलाफ चलाए गए अभियान में बढ़चढक़र हिस्सा लिया। स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध करवाया। इसका उद्देश्य बच्चों व महिलाओं को मानसिक और शरीरिक स्तर पर स्वस्थ बेहतर करना था। उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाकर उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ करना था।

होनहान बच्चों को दी शिक्षा और सहायता
गरीब मगर होनहार बच्चों के लिए भी रतन टाटा ने मदद का अभियान चलाया है। जो बच्चे गरीब व जरूरतमंद हैं और आगे पढऩा चाहते हैं, उन्हें टाटा ट्रस्ट की ओर से पूरी मदद दी गई है। टाटा ट्रस्ट ने आर्थिक मदद के जरिए ऐसे युवाओं के पढऩे के जज्बे को पूरा किया है। यह अपने आप में बड़ी पहल है।

बिजनेस की बजाए इकोनॉमी क्लास में की यात्रा
जमीन से जुड़े रहने की वजह से रतन टाटा को लोग अपने बीच का इंसान मानते हैं। श्री टाटा ने भी अपने इस व्यवहार का परिचय दिया है। वर्ष 2014 में रतन टाटा एयर इंडिया की फलाईट से गोवा जाते हुए आम आदमी की तरह इकोनॉमी क्लास में बैठकर यात्रा की थी। वह चाहते तो बिजनेस क्लास में भी यात्रा कर सकते थे। मगर उनके अंदर बैठे एक आम इंसान को लोगों से जुडऩा अच्छा लगता है। आम लोगों के साथ यात्रा करते हुए श्री टाटा ने ना केवल उनके साथ खूब बातचीत की, बल्कि उनके साथ फोटो भी खिंचवाए।

ड्राईवर की बगल मेें बैठते हैं टाटा
रतन टाटा की एक और आदत उन्हें दूसरों से अलग साबित करती है। वह जब भी अपनी कार में सफर करते हैं तो ज्यादातर अपने ड्राईवर के साथ ही बैठते हैं। कई बार तो वह अपने ड्राईवर को अपने साथ बिठाकर खुद कार ड्राईव भी करते हैं। ऐसा करके वह दूसरों को यह भी अहसास करते हैं कि वह एक समान हैं । श्री टाटा की यही सोच व कार्यप्रणाली के चलते वह ना केवल औरों से अलग हैं, बल्कि लोग उनकी पूजा भी करते हैं।

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