Friday, April 23, 2021
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कभी मां ने त्याग दिया था इसे, आज खुद बेसहारा लड़कियों को देती है सहारा, प्रकाश कौर के नेक काम को मिला पदमश्री

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कभी इस बच्ची को लडक़ी होने की वजह से उसके परिवार वालों ने त्याग दिया था। मगर अब यही बच्ची सैंकड़ों बेसहारा बच्चियों का सहारा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि के लिए सरकार ने उनका नाम पदमश्री पुरस्कार के लिए चुना है। यहां बात कर रहे हैं मूलरूप से पंजाब की रहने वाली प्रकाश कौर की। जिन्होंने अपना पूरा जीवन अभाव और कष्टों में बिताया है। मगर आज इस महिला ने खुद को एक सशक्त महिला के तौर पर ना केवल स्थापित किया, बल्कि सैंकड़ों बेसहारा लड़कियों की मां भी बन गई है। वह इन बच्चियों को लाड़-प्यार से पालती हैं, वह उन्हें मां-बाप और दादी का प्यार देती हैं। जिन बच्चों को अपने मां-बाप का नहीं पता, उन बच्चों को प्रकाश कौर पूरे जहान का प्यार देती हैं।

पदमश्री के लिए चुना गया नाम

प्रकाश कौर के इसी समर्पण भाव को सरकार ने पदमश्री पुरस्कार देने वाले लोगों में शामिल कर लिया। यह उनकी बहुत बड़ी उपलब्धि कही जा रही है, जिसके बाद ना केवल उन जैसे लोगों का हौंसला बढ़ेगा, बल्कि उससे अच्छे काम करने की प्रेरणा में इजाफा भी होगा। पंजाब के जालंधर शहर में रहने वाली प्रकाश कौर को उनके माता-पिता ने बचपन में ही त्याग दिया था। मगर जैसे तैसे वह बड़ी हुई तो उन्होंने माता पिता द्वारा त्यागे जाने बच्चों को अपनाना शुरू कर दिया। वह इन बच्चों की मां और बाप बन गई।

15 लड़कियों का कर चुकी हैं विवाह

मात्र 23 साल की आयु में ही प्रकाश कौर ने यूनिक होम नाम की एक संस्था बना ली। लोगों के सहयोग से इस संस्था को चलाया जाता है और आज उनकी इस संस्था में करीब 80 से 90 बच्चियों का लालन पालन किया जा रहा है। इस संस्था में 9 साल से लेकर 20 साल तक की बच्चियां रहती हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि वह अब तक 15 लड़कियों का घर भी बसा चुकी हैं। अच्छे परिवारों में उनकी ठाठ बाट से शादी की गई है। ये सभी लड़कियां समाज की मुख्य धारा में जुडक़र अपने परिवारों के साथ रह रही हैं।

अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ती हैं लड़कियां

प्रकाश कौर बताती हैं कि वह अपनी बच्चियों को अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाती हैं। शापिंग मॉल में उन्हें शापिंग करवाने ले जाती हैं। गर्मी की छुटिटयों में सभी बच्चों को वह हिल स्टेशन पर मस्ती करवाने के लिए भी ले जाती हैं। यही नहीं बल्कि हर साल अप्रैल की 24 तारीख को वह अपनी सभी बच्चियों का बड़ा सा केक काटकर जन्मदिन भी मनाती हैं।

प्रकाश कौर की अपील जरूर सुनें

प्रकाश कौर ने उन लोगों से अपील की है जो अपनी बच्चियों को समाज के डर से झाडिय़ों में या फिर मंदिर के सीढिय़ों पर छोड़ जाते हैं। जहां उन्हें जानवर काटकर मौत के मुंह में पहुंचा देते हैं। वह लोग कचरे या झाड़ी में अपनी बेटियों को छोडऩे की बजाए उनकी संस्था को सौंप सकते हैं। जहां उनका लालन पालन उनके अपने परिवार से भी अच्छा होता है। प्रकाश कौर के इसी कार्य को आधार बनाकर सरकार ने उन्हें पदमश्री पुरस्कार से नवाजने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इस तरह के सम्मान से समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्हें नेक और बेहतर कार्य करने प्रेरणा मिलती है।

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