Monday, April 19, 2021
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एक ऐसी जुझारू महिला, जिसने अपने दम पर की मशरूम की खेती और 100 लोगों को दे दिया रोजगार

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एक ऐसी महिला जिसने अपनी जानकारी को लोगों के रोजगार से जोड़ दिया। उन्होंने मशरूम की खेती कर लगभग 100 महिला और पुरूषों को रोजगार उपलब्ध करवाकर ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी इलाके में मिसाल दी जाती हैं। इस जुझारू और मेहनती महिला का नाम है मनोरमा सिंह। मनोरमा सिंह ने अपने परिवार की सहमति के बाद इस काम की शुरूआत की। देखते ही देखते उनके इस काम को पंख लग गए और आज प्रदेश भर में उनके इस कारनामे की खूब चर्चा होती है।

पति के साथ खेतों पर जाकर आया आईडिया

बिहार के वैशाली जिले में मनोरमा का विवाह एक किसान परिवार में हुआ था। मनोविज्ञान से गे्रजुएशन मनोरमा सिंह भी अपने पति के साथ खेतों पर चली जाया करती थी। उनके पति मनोरमा को खेती की बारीकियों से अवगत करवाते रहते थे। खे्रतों पर जाते जाते मनोरमा ने भी कुछ अलग करने का सोचा। इस दौरान उन्होंने साल 2010 में अपने खेतों पर ही एक कमरे में थोड़ा सा मशरूम उगाया। जब मशरूम हुआ तो उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार को खिलाया।

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मशरूम उगाहने की ली टे्रनिंग

इस दौरान मनोरमा के बच्चे बड़े हो चुके थे और वह कई जिम्मेदारियों से भी मुक्त हो गई थी। अपने पति और परिवार वालों की सहमति से मनोरमा ने मशरूम उगाहने की टे्रनिंग ली। टे्रनिंग पूरी हुई तो उन्हें नेशनल बागानी मिशन के तहत पंद्रह लाख रुपए की राशि मिली। इस राशि का उपयोग उन्होंने मशरूम की खेती के लिए किया। उन्होंने इसके लिए आठ कमरे और एक लैब बनाई। इसके बाद तो उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा। कुछ ही महीनों में उनका काम रफ्तार पकडऩे लगा। हालांकि इस काम को करने में उन्हें संघर्ष भी काफी किया, मगर उसका परिणाम बेहतर ही रहा।

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महिलाओं को बनाती हैं आत्मनिर्भर

इस सफलता के बाद अब मनोरमा गांव में ही कई स्थानों पर मशरूम की पैदावार करवाती है। लोगों को इस काम के प्रति प्रेरित करते हुए उन्हें प्रशिक्षण भी देती हैं। आज उनके इस काम में करीब 100 लोग जुड़े हुए हैं। इनमें महिला व पुरूष दोनों ही उनके साथ काम करते हैं। कोरोना काल में जब उनका मशरूम बाजार में जाना बंद हो गया तो इसके लिए मनोरमा व उनके साथ काम करने वालों ने नया तरीका निकाला।

आसपास बेचते थे मशरूम

गाड़ी पर रखकर मशरूम को आसपास के इलाके में बेचा जाने लगा। जो मशरूम बच जाता, उसका मुरब्बा और आचार बनाया जाने लगा। उनके इस प्रोडेक्ट की भी डिमांड हो गई। इसलिए कोरोना व लॉकडॉऊन के दौरान भी मनोरमा का काम ठप्प नहीं हुआ। उन्होंने इस संकट काल में भी अपने वर्करों को समय पर ही वेतन दिया। इस तरह से मनोरमा ने एक मिसाल पेश करते हुए ना केवल खुद को सक्षम बनाया, बल्कि बहुत से महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा। सिटीमेल न्यूज ऐसी आत्मनिर्भर और समाज को दिशा दिखाने वाली महिलाओं को सलाम करता है।

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