Saturday, November 27, 2021
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फूल बेचे, अखबार डाले, फिर शिव के जीवन में सारथी बनकर आए कृष्ण, तय करवाया IIM का रास्ता

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कई बार इंसान अपने जीवन में बड़े संघर्षों से गुजरता है। इन संघर्षों के दौरान उसको जीवन में किसी ऐसे सारथी की तलाश रहती है जो उसकी मंजिल के रास्ते को आसान कर दे। ऐसे में ही सारथी का साथ बेंगलरू के शिव नागेंद्र को मिला। इस सारथी ने न सिर्फ उनकी हर कदम पर मदद की, बल्कि उनके जीवन की दिशा को ही बदलकर रख दिया। शिव और कृष्ण का यह मिलना शायद किस्मत को भी मंजूर था।

Representation image pixabay

पहले फूल बेचे और फिर डाले अखबार
शिव नागेंद्र के पिता एक प्राइवेट कंपनी के लिए ट्रक चलाते थे। शिव के परिवार शुरुआत से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। लेकिन शिव ने कभी भी अपनी परेशानियों के चलते रूकना नहीं सीखा। शिव ने अपने लिए एक मंजिल तय कर रखी थी। इसके लिए उन्हें जो भी करना पड़ा। उन्होंने वह सब काम किया। शिव अपने लिए हर उस व्यक्ति को प्रेरणा मानते है। जिन्होंने बुरे समय में इनकी मदद की।

अंग्रेजी मीडियम स्कूल में कराया दाखिला

शिव के पिता चाहते थे कि उनका बेटा खूब पढ़े। इसलिए उन्होंने उसका दाखिला अंग्रेजी मीडियम स्कूल में कराया। स्कूल में दाखिले के लिए मां के गहने तक बेचने पड़े। लेकिन यह स्थिति हमेशा कायम नहीं रह सकती थी। क्योंकि स्कूल में हर माह फीस भरनी पड़ती थी। हर माह स्कूल की फीस भरना मुश्किल हो गया। स्कूल से भी शिव को फीस लेकर स्कूल आने की चेतावनी आने लगी। हालांकि शिव ने अपने स्कूल की फीस को लेकर फूल बेचने और घर-घर जाकर अखबार डालने का काम भी किया। लेकिन इससे स्कूल की फीस पूरी नहीं हो पाई।

शिव के जीवन में सारथी बनकर आए कृष्ण
उस दिन शिव सुबह सुबह घरों में अखबार डालने के लिए निकले थे। कृष्ण उनके पहले की ग्राहक थे। कृष्ण घर के बाहर अपने दरवाजे पर खड़े थे। शिव को पता नहीं क्या सूझा वह कृष्ण को देखकर रूक गए। उन्होंने कृष्ण को देखकर कहा कि क्या आप मेरे स्कूल की फीस भर सकते हैं। मैं आपके सभी काम कर दूंगा। इस पर कृष्ण ने उन्हें हैरानी से देखते हुए कहा कि मैं तो तुमको अच्छी तरह जानता भी नहीं हू।

स्कूल जाकर पता की सच्चाई तो दिया साथ
शिव ने कृष्ण से कहा कि उनके स्कूल की फीस नहीं भरी है। वह स्कूल से निकाले भी जा सकते हैं। अगर वह स्कूल की फीस भर देंगे तो उनका सारा काम कर देंगे। इस पर कृष्ण ने शिव के स्कूल जाकर पता किया तो वह स्कूल शिक्षक ने बताया कि शिव होनहार स्टूडेंट््स है। वह पैसों की वजह से मार खा रहा है। तब कृष्ण ने शिव की फीस भर दी। इसके बाद कृ ष्ण शिव की हर माह की फीस भरने लगे। शिव ने आईसीएसई बोर्ड 10वी से टाप किया।

जीवन भर बना रहा कृष्ण का साथ
स्कूल की फीस भरने से शुरू हुए सिलसिले से शिव और कृष्ण का साथ हमेशा बना रहा। शिव ने बेंगलुरू आफ टेक्नॉलाजी में दाखिला लेने के बाद कंप्यूटर साइंस चुना। इसके बाद शिव इलेक्ट्रानिक शाप में काम करने लगे। इस बीच जीवन में काफी परेशानियां आई। लेकिन कृष्ण के साथ सबका समाधान होता हुआ चला गया। एक समय शिव का चुनाव कैंपस इंटरव्यू के जरिए विप्रो कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर हो गया। लेकिन कृष्ण के कहा वह ज्यादा के हकदार है। शिव ने कृष्ण की बात मानते हुए उन्हें कैट की तैयारी करने लगे। कैट की तैयारी में भी कृष्ण ने शिव की पूरी मदद की। उनके नोट्स तैयार करवाएं।

बड़े बड़े अखबारों ने की स्टोरी कवर
शिव ने कड़ी मेहनत और कृष्ण के साथ की बदौलत कैट क्लीयर कर ली। बड़े बड़े अखबारों में उनकी स्टोरी छापी गई। प्लेसमेंट शुरू होने के पहले दिन ही उन्हें नौकरी मिल गई। शिव कहते है कि कृष्ण वेदव्यास के साथ उनके सफलता का श्रेय उनकी मां को भी जाता है। मां ने भी उनके लिए बड़े त्याग किए। वह कहते है हर इंसान सफलता की सीढ़ी चढ़ सकता है। बर्शेत उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई कृष्ण हो।

 

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