Tuesday, April 20, 2021
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पोती को पढ़ाने के लिए दादा ने बेच दिया अपना घर, परिवार पालने के लिए ये बुजुर्ग चलाते हैं ऑटो

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

कभी-कभी किसी की कहानी कितना हौंसला और हिम्मत देती है, इसका अनुमान आप आसानी से लगा सकते हैं। इस हौंसले की जीती जागती कहानी जानकर आपके भीतर भी साहस भर जाएगा। इस कहानी को जानकर तब लगता है कि आपकी मुश्किल कुछ भी नहीं। आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं,जिसको पढऩे के बाद आपको लगेगा कि उनके सामने आपकी मुसीबत कुछ भी नहीं है।

परिवार को पालने के लिए आटो चलाते हैं बुजुर्ग देसराज

आज बात करने जा रहे हैं एक बुजुर्ग देसराज की,जिन्होंने अपने दो बेटे को खोने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। बुजुर्ग देसराज की कहानी जानकर आप भावुक हो जाएंगे। आपको पता चलेगा कि किस तरह से इस बुजुर्ग ने अपने परिवार का लालन-पालन करने व अपनी पोती को पढ़ाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। उन्होंने खुद को मेहनत की भठ्ठी में झोंक दिया और अपने परिवार की खुशहाली के लिए कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी।

दो बेटों का हुआ निधन

मीडिया से बात करते हुए देसराज ने बताया कि करीब 6 साल पहले उसके 40 साल के बेटे की अचानक मौत हो गई। अभी वह इस गम से उभर भी नहीं पाए थे कि दूसरा बेटा भी उन्हें हमेशा के लिए छोडक़र भगवान को प्यारा हो गया। इसके बाद सारे परिवार की जिम्मेदारी उनके बूढे कंधों पर आ गई। परिवार का लालन पालन करने के लिए बुजुर्ग देसराज ने ऑटो का हैंडल थाम लिया और अपने परिवार का पेट पालने लगे।

पोती ने पढ़ाई छोडऩे के लिए कहा

इस उम्र में दादा को मेहनत करता देखकर 9 वीं क्लास में पढ़ रही पोती ने पढ़ाई छोडऩे की इच्छा जताई। पंरतु दादा ने ऐसा करने से मना कर दिया और पोती की पढ़ाई जारी रखी। हैरत की बात है कि देसराज दिन रात ऑटो चलाकर महज 10 हजार रुपए तक ही कमा पाते थे। उसमें से वह 6 हजार रुपए पोती की पढ़ाई पर खर्च करते थे।

पोती ने 12वीं की पास

देसराज सुबह 6 बजे ही ऑटो लेकर निकल जाते हैं और देर रात तक वापिस आते हैं। कई बार तो घर में खाने के लिए राशन का इंतजाम भी नहीं हो पाता। मगर उस वक्त उनकी बूढी आंखें चमक उठी, जब पोती ने 12 वीं में 80 प्रतिशत नंबर हासिल किए। उस दिन देसराज ने सारा दिन लोगों को मुफ्त में ही ऑटो में सवारी करवाई। 12वीं पास करने के बाद पोती ने दिल्ली में बीएड करने की इच्छा जताई।

पोती के लिए बेच दिया घर

पोती को बीएड करवाने के लिए दादा ने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए अपना घर बेच दिया। परिवार वालों को उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के घर में शरण दिलवा दी। घर बेचकर मिले पैसे से वह अपनी पोती को उच्च शिक्षा दिलवा रहे हैं। आपको यह जानकर दुख होगा कि देसराज अपने घर का खर्च चलाने के लिए दिन भर ऑटो चलाते हैं और रात को उसी में सोते भी हैं। ये है बुजुर्ग देसराज के हिम्मत, जज्बे और साहस की जीती जागती कहानी। ऐसे शख्स को सिटीमेल न्यूज सलाम करता है।

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