Tuesday, April 20, 2021
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दिव्यांग पिता की ढाल बनकर खड़ी हुई बेटी, बंद होने वाले डेयरी उद्योग को फिर बुलंदी पर पहुंचाया

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कड़ी मेहनत से किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। इसके लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। इस बात को महाराष्ट्र के अहमदनगर की रहने वाली श्रद्धा धवन ने साबित कर दिया है। जिन्होंने अपने पिता के उस कारोबार को बुलंदी पर पहुंचाया जो बंदी की कगार पर पहुंच चुका था। यह काम श्रद्धा ने महज 21 साल की उम्र में किया था। श्रद्धा ने 11 साल की उम्र में ही अपने बिजनेस की बागडौर अपने हाथों में ली। इस उम्र में बच्चे बाहरी दुनिया से वाकिफ भी नहीं होते हैं। श्रद्धा ने न केवल बिजनेस को संभाला, बल्कि उस बिजनेस को पूरी तरह से सफल कर दिया। यह बिजनेस डेयरी का था।

Representation image pixabay

बिजनेस और पढ़ाई में श्रद्धा ने बनाया गजब का तालमेल

श्रद्धा ने 11 साल में अपना बिजनेस संभालते हुए पढ़ाई में तालमेल बनाया। उस समय कई लोगों का कहना था कि इतनी छोटी उम्र में केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। इस बात को लेकर उनके दिव्यांग पिता को भी ताने दिए गए । लेकिन श्रद्धा ने बिल्कुल भी हार नहीं मानी। वह अपने पिता की तरह ही बाहर दूध बेचने के लिए जाने लगी। श्रद्धा की मेहनत का नतीजा है कि उनका बिजेनस 72 लाख सालाना टर्नओवर तक पहुंच गया।

दिव्यांग पिता के सामने थी कई मुश्किले

श्रद्धा के पिता दिव्यांग होने के कारण उनके सामने कई मुश्किले थी। वह सामान्य व्यक्ति की तरह मार्किट में जाकर काम नहीं कर सकते थे। शारीरिक स्थिति खराब होने के कारण उनकी छह में से पांच भैसे बिक गई। अब श्रद्धा के पिता के पास केवल एक ही भैस थी। इस समय श्रद्धा को लगा कि अगर पिता की बिजनेस में सहायता नहीं की गई तो काफी देर हो जाएगी। श्रद्धा ने बिजनेस में घुसते ही उसे अलग तरीके से करना शुरू कर दिया। श्रद्धा ने डेयरी के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। अब वह केवल दूध पर ही निर्भर नहीं रही। उसने दूध से बने अन्य प्रोडेक्ट पर भी काम करना शुरू कर दिया।

दूध के व्यापार के साथ संभाल लिया परिवार

बिजनेस के बिखरने के बाद श्रद्धा का परिवार भी पूरी तरह से टूट गया था। ऐसे में श्रद्धा ने न केवल अपने व्यवसाय को बुलंदी पर पहुंचाया। बल्कि अपने टूटे हुए परिवार को भी संभाल लिया। श्रद्धा के पास कुल 80 भैसे हो गई है। वहीं श्रद्धा का दावा है कि उनके दूध में किसी भी तरह की मिलावट नहीं होती। आसपास गांव के लोग भी श्रद्धा के दूध पर पूरा भरोसा करते हैं। दूध के कारोबार से ही श्रद्धा की हर माह छह लाख रुपए की आमदनी होती है। श्रद्धा कहती है कि आपके पास सफलता उम्र देखकर नहीं आती। इसलिए हमेशा प्रयसा और मेहनत करते रहना चाहिए।

 

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