Thursday, April 22, 2021
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प्रतियोगिता के कारण पिता के अंतिम संस्कार में नहीं हो पाई शामिल, जज्बे से बनी नेशनल चैंपियन

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कभी कभी आम लोग कुछ ऐसा खास कर जाते है, जिससे सभी की नजरे उन्हीं पर आकर टिक जाती है। हरियाणा पुलिस में महिला कांस्टेबल के पद पर भर्ती होने वाली अनीता देवी ऐसी ही इंसान है। अनीता ने तीन साल के भीतर कांस्टेबल से लेकर इंटरनेशनल शूटर बनने तक का सफर तय किया। अनीता शूटिंग प्रतियोगिकता के कारण अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाई थी।
अनीता देवी वर्ष 2008 में हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुई। अनीता का लक्ष्य था कि वह जल्द से जल्द प्रमोशन हासिल करे। इसके लिए उन्होंने निशानेबाजी को चुना। इस काम में उनके पति धर्मवीर गुलिया ने उनका पूरा साथ दिया। हालांकि उन्हेंं उस समय बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह नेशनल स्तर पर पदक जीतेगी।

BBC

इस तरह से हुई अनीता देवी के करियर की शुरुआत
अनीता देवी का जन्म पलवल के लालपुरा गांव में हुआ। अनीता के पिता एक पहलवान थे। वह चाहते थे कि अनीता भी किसी खेलकूद में हिस्सा ले। हालांकि वह अनीता को भी पहलवान बनाना चाहते थे। लेकिन अनीता ने रेसलर बनने से मना कर दिया। क्योंकि इसमें कान बिगड़ जाते है। ऐेसे में अनीता ने शूटिंग को अपना जीवन बनाया।

जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में इंटरनेशनल टूर्नामेंट में नहीं ले पाई हिस्सा

अनीता बताती है कि वर्ष 2013 में काफी अच्छे दौर में थी। उन्होंने नेशनल स्तर पर कई पदक हासिल किए। लेकिन सही जानकारी और गाइडेंट के अभाव में वह इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन की संबद्धता हासिल नहीं कर पाई। एक समय अनीता भारत की नंबर तीन निशानेबाज थी। दरअसल शूटिंग  फेडरेशन का संबद्धता पत्र की जरूरत भारत सरकार को होती है। इसके बाद ही किसी एथलीट को इंटरनेशनल इवेंट में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा जाता है। अनीता सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण यह नहीं कर पाई।

14 साल के बेटे को बनाना चाहती है इंटरनेशनल शूटर

अनीता देवी के मन में अभी भी इंटरनेशनल शूटर नहीं बन पाने की कसक है। यह कसक वह अपने बेटे को इंटरनेशनल शूटर बनाकर पूरा करना चाहती है। अनिता को उम्मीद है कि उनका बेटा एक दिन भारत के लिए ओलंपिक मेडल जरूर जीतेगा। अनीता कहती है कि उनके पिता और पति का साथ नहीं मिला होता तो वह कभी भी नेशनल स्तर तक नहीं पहुंच सकती है। वह कहती है कि उनका बेटा ओलंपिक मेडल जीतकर सपना जरूर पूरा करेगा।

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