Friday, April 23, 2021
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पिता कोयले की खदान में करते थे काम, आजीविका चलाने के लिए करना पड़ा संघर्ष, अब बने डीएसपी

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कई बार विषम परिस्थितियों से ऐसी प्रतिभाएं निकलकर आती है जो सबको हैरान कर देती है। ऐसे ही विषम परिस्थितियों से निक ले युवा ने न सिर्फ अपनी मंजिल को हासिल किया, बल्कि अपने पूरे परिवार का नाम भी रोशन किया। झारखंड के रहने वाले किशोर कुमार रजक के गांव में कई वर्षों से बिजली नहीं थी। उनके पिता कोयले की खदान में काम करते थे। वह परेशानियों के गहरे दलदल में फंसे हुए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानते हुए अपनी सफलता की मंजिल हासिल की।

 

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परिवार को आर्थिक दिक्कतों से करना पड़ा संघर्ष

किशोर का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। उन्हें पढ़ाई लिखाई और आजीविका के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके पिता जीविकोपार्जन के लिए कोयला खदान में काम करते थे। पिता के पास पैसे तो अधिक नहीं थे। लेकिन उन्होंने मजदूरी करके अपने बेटे को अच्छी पढ़ाई करवाई। जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके।

सरकारी स्कूल से की शुरुआती पढ़ाई

घर में आर्थिक परेशानी होने के चलते किशोर ने अपनी स्कूली पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। सरकारी स्कूल में पढ़ाई का ढाचा क्या होता है इसको समझना किसी के लिए भी मुश्किल नहीं है। स्कूल में अधिकतर शिक्षक अनुपस्थित ही रहते थे। लेकिन किशोर को विषम परिस्थितियों में रहने की आदत हो गई थी। उनके पिता हमेशा कहते कि उनका बेटा बड़ा होकर कलेक्टर बनेगा। किशोर को पढ़ाई के साथ अपने पिता के काम मेंं भी हाथ बांटना पड़ता।

शिक्षक की डॉट ने बदला किशोर का जीवन

किशोर के पूरे जीवन की दिशा एक शिक्षा की डाट ने बदल दी। किशोर जब स्कूल जाते तो अपना थैला बाहर ही छोड़ देते। स्कूल खत्म होने के समय वह थैला उठा लेते। एक दिन शिक्षक की नजर किशोर के एक कारनामे पर पढ़ गई। उन्होंने किशोर का डांटते हुए एक बात कही जो उनके दिल से लग गई। शिक्षक ने कहा कि अगर तुमसे से कोई बच्चा सफल होकर मुकाम हासिल कर लेगा। तो उन्हें फक्र होगा। तब से किशोर इस बात को ध्यान में रखतें हुए अपनी पढ़ाई करने लगे।

स्कूली परीक्षा में अच्छे नंबर से हुए पास

किशोर ने बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा अच्छे से की। बोर्ड परीक्षा में भी उनके अच्छे अंक आए। इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन भी की। लेकिन वह तीसरे प्रयास में असफल हो गए। लेकिन वह डरे नहीं। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। जिसके लिए उन्हें दिल्ली जाने की जरूरत थी। जिसके लिए पैसे भी चाहिए थे।

बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर किया गुजारा

किशोर दिल्ली में आकर अपना गुजारा करने लगे। उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया। जिससे पैसों का इंतजाम हो सके। ट्यूशन में बच्चों की संख्या बढऩे लगे। जिससे उनके आर्थिक हालात भी ठीक हो गए।

पहले ही प्रयास में टेस्ट किया पास

किशोर की मेहनत पहले ही प्रयास में रंग लाई। उनका चयन असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर हुआ। इसके बाद वह डीएसपी बने। किशोर की सफलता उनके पूरे गांव के लिए सफलता का स्त्रोत बन गई। किशोर ने कहा कि युवाओं को हमेशा मेहनत करनी चाहिए। ताकि अपने और परिवार का भविष्य बेहतर बना सके।

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