Friday, April 23, 2021
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हौंसले की कला: केले के कचरे से लिखी अपनी किस्मत, 8 वीं पढक़र भी 300 लोगों को दे रहे हैं रोजगार

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

लोगों को पता नहीं था कि यह आर्थिक तंगी की वजह से स्कूल छोडऩे वाला यह बच्चा बड़ा होकर ऐसा बिजनेसमैन बन जाएगा, जोकि ना केवल खुद की कंपनी खड़ी कर देगा, बल्कि लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाएगा। यह कहानी है एक ऐसे बच्चे की ,जिसका पूरा जीवन अभावों में बीता। मगर उसने एक दिन ऐसा हौंसला दिखाया कि आज लोग उनकी कंपनी में काम करना चाहते हैं।

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छोडऩा पड़ा था स्कूल

तमिलनाडू के मदुरै के मेलाक्कल गांव में रहने वाले इस बच्चे का नाम था पीएम मुरूगनस,जिसे केले के कचरे को अपनी अदभुत कला से इस तरह से उपयोग में लिया कि आज उससे लाखों रुपए की कमाई की जा रही है। पीएम मुरूगनस ने आठवीं तक ही पढ़ाई की थी। आर्थिक रूप से दिक्कत होने की वजह से उन्हें बीच में ही अपना स्कूल छोडऩा पड़ा था। गरीब किसान परिवार में रहने वाले पीएम मुरूगनस ने स्कूल छोडऩे के बाद अपने पिता के साथ खेतों पर काम करना शुरू कर दिया। साल 2008 में पीएम मुरूगनस ने केले के कचरे से एक रस्सी बनाने की कोशिश की। मगर वह इसमें सफल नहीं हो पाए।

फिर बनाई मशीन और हो गए सफल

साल 2017 में एक बार फिर से पीएम मुरूगनस ने साईकिल पहिए से खुद की एक मशीन बना ली,जिसकी मदद से वह कचरे की कतई बनाने में सफल रहा। इस मशीन को दिखाने के लिए उसने जैव प्रौद्यिगिकी की उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद के अधिकारियों से संपर्क साधा। पीएम मुरूगनस ने उन्हें अपना यह अविष्कार दिखाया। अधिकारियों ने मशीन देखने के बाद पीएम मुरूगनस को शाबासी दी। इससे प्रेरित होकर पीएम मुरूगनस ने अपने इस अविष्कार को और बेहतर बनाने के लिए उसमें 1.5 लाख रुपए का निवेश कर दिया।

300 लोगों को दिया रोजगार

इस तरह से पीएम मुरूगनस ने ना केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि 300 लोगों को रोजगार से भी जोड़ दिया। इनमें महिलाओं की संख्या काफी अधिक है। बता दें कि पीएम मुरूगनस की कंपनी का नाम एमएस रोपस प्रोडेक्शन सेंटर है, जिसका वार्षिक टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपए से भी अधिक है। पीएम मुरूगनस ने अपने इस इनोवेशन के लिए कई बड़े पुरस्कार भी जीते हैं।

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