Thursday, April 22, 2021
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इंसान के रूप में फरिश्ता हैं लेक बहादुर, ऑटो रिक्शा चलाकर अपनी नेक कमाई से संवार रहे हैं बेसहारा बच्चों का भविष्य

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मैं चला था अकेले ही मंजिल की ओर, मैं चलता गया और काफिला जुड़ता गया। यह कहानी है एक ऐसे रिक्शा चालक की, जिसने अपना पेट खाली रखा, मगर बेसहारा और अनपढ़ बच्चों को सहारा दिया। ऐसे लोग किसी देवदूत से कम नहीं होते, जोकि खुद जलकर दूसरों को रोशनी देते हैं। आज इस स्टोरी में बात करेंगे एक ऐसे इंसान की, जोकि अपना पेट काटकर दूसरा का जीवन संवार रहा है। इस इंसान का नाम है लेक बहादुर, जिसे लोग अब मास्टर सर के नाम से पहचानते हैं।

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खुद अनपढ़, मगर संवार रहा है बच्चों का भविष्य

मूल रूप से सिलीगुडडी बंगाल के निवासी लेक बहादुर का असली नाम शिव कटवाल है। वह पिछले 19 सालों से ऑटो रिक्शा चलाकर शिक्षा का अंधकार दूर करने में जुटे हैं। 1985 में जन्में शिव कटवाल खुद नौंवी कक्षा तक पढ़े हैं। आर्थिक स्थिति ठीक ना होने की वजह से उन्हें पढ़ाई छोडऩी पढ़ी। रोजगार के लिए शिव बेंगलूरू चले गए थे, मगर वहां उन्हें भाषा का ज्ञान ना होने की वजह से परेशानी और जिल्लत का सामना करना पड़ा था। इसलिए वह वापिस अपने प्रदेश आ गए। वह कुछ काम करने की सोच ही रहे थे, तभी उन्हें चाय बागान के पास कुछ बच्चे भटकते हुए दिखाई दिए। उन्होंने इन बच्चों में खुद को देखा और मदद के लिए उनकी तरफ हाथ बढ़ा दिए।

खुद पढऩा चाहते थे मगर..

शिव ने बताया कि वह बचपन में खूब पढऩा चाहते थे, मगर आगे नहीं पढ़ सके। जब उन्हें यह बच्चे दिखाई दिए तो वह उन्हें पढ़ाने की सोचने लगे, ताकि वह शिक्षित बनकर खुद का भविष्य संवार सकें। इस सोच के साथ उन्होंने इन बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। बच्चों ने भी पढ़ाई में रूचि ली और देखते ही देखते उनकी संख्या बढऩे लगी। बच्चों को पढ़ाने में आने वाले खर्च को वह ऑटो रिक्शा चलाकर पूरा करने लगे।

कर दी खुशी शिक्षा केंद्र की स्थापना

बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिव ने खुशी शिक्षा केंद्र की स्थापना कर दी। जिसे वह ऑटो चलाकर होने वाली कमाई से संचालित करने लगे। जिसमें कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर पढ़ाया जाने लगा। हालांकि पहले पहल ना तो लोग उनकी मदद के लिए आगे आए और ना ही उन्होंने किसी से मदद की उम्मीद रखी। मगर जैसे जैसे लोगों को उनके इस नेक काम की जानकारी हुई तो वह मदद के हाथ बढ़ाकर आगे आ गए।

मैडल भी लाते हैं बच्चे

इस तरह से शिव कटवाल के इस स्कूल में बच्चों को शिक्षा के साथ साथ जूडो कराटे, मार्शल आर्ट, और कराटे की शिक्षा भी दी जा रही है। कई बच्चे तो इस खेल में मैडल भी ला रहे हैं। इस तरह से एक इंसान ने अपने नेक काम से बच्चों का भविष्य संवारने का जो सपना देखा वह उनके दृढ़ सकंल्प और जज्बे की वजह से पूरा होने लगा है। फिलहाल उनके शिक्षा केंद्र में 40 बच्चे जुड़े हुए हैं।

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