Wednesday, April 21, 2021
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मां बेचती थी घर-घर चूडियां, भाई चलाता था ऑटो, बहन ने अपनी काबलियत के बूते पाया कलैक्टर का पद

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इंसान में कुछ करने का जज्बा हो तो वह क्या नहीं कर सकता। यह साबित किया है एक ऐसी लडक़ी ने, जिसका परिवार आर्थिक संकट में फंसा हुआ था। मां घर-घर जाकर चूडिय़ां बेचा करती थी और भाई ऑटो चलाता था। पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बावजूद इस परिवार की बच्ची वसीमा शेख ने अपनी पढ़ाई के दम पर कलेक्टर बनकर अपने परिवार का मान सम्मान बढ़ाया है।

वसीमा ने ताने झेलकर की पढ़ाई

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले की रहने वाली वसीमा शेख ने महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल करके एक इतिहास रचा है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वसीमा शेख के परिवार को काफी कुछ सहना पड़ा है। इस परिवार को लोगों के ताने झेलने पड़े हैं। इसके बावजूद इन सभी का हौंसला डिगा नहीं। वसीमा के भाई ने भी अपनी ग्रेजुएशन पास करके ऑटो छोडक़र एक छोटी कंपनी में नौकरी कर ली। इससे होने वाली आय से ही उसने अपनी बहन को पढ़ा लिखाकर इस लायक बना दिया कि वह आज कलेक्टर बनकर अपने परिवार का सपना पूरा कर पाई है।

छोटी उम्र में हो गई थी वसीमा की शादी

वसीमा ने अपनी पढ़ाई गांव के स्कूल से ही पूरी की है। पढऩे में अव्वल स्थान पर रहने वाली वसीमा शेख का निकाह मात्र 18 साल की आयु में हो गया था। उनके पति शेख हैदर महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की तैयारी करवाते थे। अखबारों में लोगों के कामयाब होने की खबरें पढऩे के बाद वसीमा ने भी महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा देने की तैयारी शुरू कर दी थी। पति और परिवार वालों ने प्रोत्साहित किया, जिसके परिणाम स्वरूप वर्ष 2018 में उसने अपनी परीक्षा दी। जब इसका रिजल्ट आया तो वसीमा को सेल्स टैक्स विभाग में इंस्पेक्टर की नौकरी मिल गई।

इसलिए दोबारा दी परीक्षा

हालांकि यह परिणाम उनके आशा अनुसार नहीं रहा था। इसलिए वसीमा ने दोबारा से साल 2020 में महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा दी। इस बार जो रिजल्ट आया, उसने वसीमा की उड़ान को पंख लगा दिए। इस बार पूरे महाराष्ट्र में महिला कैटेगरी में उन्हें तीसरी रैंक मिली थी। इसके बाद वसीमा शेख को डिप्टी कलेक्टर की नौकरी मिली। जोकि उनकी जिंदगी की एक नई और शानदार शुरूआत थी। इस तरह से सामाजिक ताने बाने में उलझी एक मासूस सी लडक़ी ने अपनी खुद की मेहनत और परिवार वालों की प्रेरणा से मुश्किल मंजिल को पाने में सफलता हासिल कर ली।

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