Friday, April 16, 2021
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मां की बगावत आई काम, बच्चों को टयूशन पढ़ाकर दूध वाले की बेटी बन गई आईएएस अफसर

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पिता दूध बेचते थे और मां अनपढ़ थी। घर में पैसों की किल्लत थी, इसके बावजूद मां ने अपनी बेटी को आईएएस अफसर बनाने के लिए परिवार में बगावत कर दी । बेटी ने भी अपनी मां की इस कोशिश को बेकार नहीं जाने दिया और यूपीएससी पास कर आईएएस अधिकारी बन गई। यह कहानी है हरिद्वार में एक छोटे से परिवार में रहने वाली अनुराधा पाल की।

मां की बदौलत बन पाई आईएएस अफसर

अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अनुराधा अपनी मां को देती है। दरअसल अनुराधा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थी। उन्होंने 12 वीं तक की शिक्षा जवाहर नवोदय स्कूल से पूरी की। इसके बाद परिवार वाले चाहते थे कि लडक़ी को अधिक पढ़ाने की बजाए उसकी शादी कर दी जाए। हालांकि अनुराधा के परिवार वाले उसे 12 वीं पढ़ाने के लिए भी सहमत नहीं थे। लेकिन अनुराधा आगे भी पढऩा चाहती थी। मां ने घर में बगावत कर दी और कहा कि यदि उसकी बेटी को पढऩे से रोका गया तो वह घर छोडक़र चली जाएगी। इसके बाद ही अनुराधा को आगे पढऩे की अनुमति दी गई। अनुराधा ने आईआईटी रूडक़ी में एंटे्रस परीक्षा दी, मगर वहां दाखिले के लिए उनके पास रुपए नहीं थे। तब मां ने कर्ज लेकर अनुराधा को वहां दाखिला दिलवाया।

आईआईटी के बाद यूपीएससी करने की सोची

आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुराधा ने यूपीएससी करने की सोची। जिसके लिए उसे दिल्ली जाना पड़ा। हालांकि वह अपने परिवार की माली हालत से अच्छी तरह से अवगत थी। इसलिए यूपीएससी में तैयारी करते वक्त अनुराधा ने बच्चों को टयूशन देना शुरू कर दिया। इस तरह से उसने यूपीएससी की पूरी तैयारी की और परीक्षा देकर खुद को साबित किया। पहली बार अनुराधा को 451 रैंक मिली, जिस पर उन्हें आईआरएस का पद मिला।

दोबारा दी यूपीएससी की परीक्षा

हालांकि इस पोस्ट पर अनुराधा ने ज्वाइंन तो कर लिया, मगर उनका मन आईएएस अधिकारी पर अटका हुआ था। उन्होंने दो साल नौकरी करने के बाद वर्ष 2015 में फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी। इस बार उन्हें जोरदार सफलता मिली और वह 62 वीं रैंक के साथ आईएएस अधिकारी बनने में सफल रही। इस तरह से अनुराधा पाल ने अपनी मेहनत और मां का साथ मिलने के बाद इस बड़े पद पर सफलता हासिल की। सिटीमेल न्यूज ऐसी मां को प्रणाम करता है, जिन्होंने अपनी बेटी को उच्च शिक्षित करने के लिए अपने परिवार से बगावत कर दी।

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