Friday, April 23, 2021
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कभी एक-एक रुपए के लिए मोहताज थी अनीता पहले खुद बनी आत्मनिर्भर अब दूसरों को भी दे रही रोजगार

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कुछ लोग अपनी मेहनत से रूठी हुई किस्मत को भी बदल देते है। लिट्टीपाड़ा की अनिता मुर्म ऐसे ही लोगों में शामिल है। अनीता कभी एक-एक रुपए के लिए मोहताज थी। लेकिन उसने अपनी मेहनत से न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारा बल्कि अब वह दूसरों को भी रोजगार देने लगी है। कुछ समय पहले तक अनीता दूसरे के खेतों में जाकर मजदूरी करके किसी तरह 100 से 200 रुपए कमाती थी। ताकि उसके परिवार के खाने पीने का जुगाड़ हो सके। मजदूरी करके बच्चों का पेट तो भर सकता था, लेकिन बच्चों की पढ़ाई लिखाई करवाना मुश्किल था।

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होटल कारोबार शुरू करने का आया विचार

अनीता बताती है कि मजदूरी करते हुए जब वह काफी परेशान हो गई तो उसके मन में विचार आया कि होटल कारोबार शुरू किया जाए। लेकिन उनके पास उस समय कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी नहीं थी। ऐसे में अनिता ने सरकार के स्टार्टअप ग्रामीण उद्मयिता कार्यक्रम का सहारा लिया। जिसके बाद से राह निकल आई। वह बताते है कि उन्होंने दिसंबर में साहिबगंज गोबिदपुर हाइवे पर होटल खोल दिया। यहां पर उनकी जमीन थी। अनिता ने झारखंड आजीविका मिशन से होटल संचालन के साथ खाता साधरण का प्रशिक्षण लिया। अब उनकी एक दिन हजार रुपए से अधिक आय होने लगी है। वह दूसरों को भी रोजगार दे रही है।

कोरोनाकाल में खड़ा किया व्यवसाय

अनीता बताती है कि उन्होंने अपना व्यवसाय कोरोनाकाल में खड़ा किया। अनिता ने बताया कि सखी मंडल से जुड़ी महिला या उसके परिवार का सदस्य स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत कुटीर उदयोग शुरू कर सकता है। उन्होंने व्यवसाय का प्रस्ताव बनाकर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी के कार्यालय में दिया। जिसके बाद उनको बिना गारंटी के 30 हजार रुपए लोन मिल गया। होटल खोलने के बाद अनीता ने दो लोगों को रोजगार भी दिया। अनिता बताती है कि उनकी शादी वर्ष 2005 में हुई। उन्होंने शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने गांव में भी मजदूरी की। वह बताती है कि वह स्वावलंबी बनना चाहती थी। इसलिए वर्ष 2014 में गांव सवेरा आजीविका खसी मंडल से जुड़ गई। जेएसएलपीएस के समन्वयक प्रवीण मिश्रा बताते है कि अनीता की शुरुआत से ही कुछ बड़ा करने की इच्छा थी। जो उसने कर दिखाया।

 

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