Tuesday, April 20, 2021
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सूखाग्रस्त गांव के लिए संजीवनी बने रिटायर्ड प्रोफेसर, दो महीने में ही बदल दी तस्वीर

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घटते जलस्तर के कारण देश के कई गांव सूखे का शिकार हो रहे हैं। गांव के साथ अब शहरों में भी पानी की किल्लत बढऩे लगी है। लेकिन अभी भी कई ऐसे लोग है। जो जल संरक्षण करके गांव की तस्वीर को बदलने में लगे हैं। राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर अशोक सोनवणे प्राइवेट कालेज से रिटायर्ड हुए थे। प्रोफेसर ने नासिक के गांव देशवंडी को सूखे से पूरी तरह से निजात दिला दी।
कालेज के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी के पद पर रहते हुए इन्हें कई जगहों पर जल संरक्षण पर लेक्चरर देने के लिए बुलाया था। इसी तरह इनको वर्ष 2018 में नासिक से 30 किलोमीटर दूर सिन्नारा तालुका के पास देशवंडी गांव में लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया गया था। यहां पर इनको जानकारी मिली कि इलाके में पानी की काफी कमी है। हर साल यहां पर सूखाग्रस्त हो जाता है। लोगों को पानी के लिए काफी भटकना पड़ता है। दिसंबर माह में टैंकर बुलाने की जरूरत पड़ जाती है। अशोक सनवणे ने युवाओं को बारिश का पानी सहेजने का सुझाव दिया।

ग्राम पंचायत से जमीन लेने में सामने आई परेशानी

युवाओं को सुझाव देने के लिए अशोक सोनवणे ने खुद ही बारिश का पानी सहेजने के लिए प्रयोग शुरू कर दिए। इस दौरान उन्हें ग्राम पंचायत से जमीन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। काफी समझाने के बाद ग्राम पंचायत से इन्हे गांव के पास ही खाई की खुदाई करने के लिए 32 हेक्टेयर जमीन मिल गई। जमीन मिलने के बाद अशोक ने खुदाई शुरू कर दी।

बारिश में दिखाई दी सफलता

2018 में पहली मानसून के बाद 500 एमएम बारिश हुई। इससे बारिश के पानी का संरक्षण करने में सफलता प्राप्त हुई। जिसे देखकर ग्राम पंचायत ने उनको जमीन दे दी। इसके बाद अशोक ने दो पहाडिय़ों के साथ 100 हेक्टेयर नालियों में खुदाई करवाई। जिससे इलाके के भूजल में बृद्धि हुई। अशोक सोनवणे बताते है कि पूरे काम में करीबन 80 हजार रुपए का खर्च आया। जिससे अशोक ने भी कुछ पैसे दिए। बाकी पैसे लोगों से जमा किए।

दो साल नहीं पड़ी टैंकर बुलाने की जरूरत
जल संरक्षण के दौरान मिट्टी में कटाव रोकने के लिए घास और कांटेदार झाडिय़ा लगवाई गई। अब सूखाग्रस्त कहे जाने वाले गांव के हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। जल संरक्षण की वजह से ब्रिटिश काल से जो 32 बैराज थे वह फिर से जीवित हो गए। यह वाटर कैनाल का काम करते हैं। गांव में दो साल से टैंकर बुलाने की जरूरत नहीं पड़ी। वाटर कैनाल काम करने पानी लगातार आता है।

 

 

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