Tuesday, April 20, 2021
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टैक्सी ड्राईवर की बेटी ने किया अपने पिता का नाम रोशन, आईआईटी की पास, बनना चाहती है IAS अफसर

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Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

कामयाबी हासिल करने के लिए इंसान को जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। सच्ची लगन और अथक परिश्रम किसी भी व्यक्ति को सफल बनाने के लिए प्र्रेरित करता है। ऐसी ही एक कहानी है कैब ड्राईवर की बेटी स्वाति की। आर्थिक रूप से बेहद ही कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाली स्वाति ने अपनी मेहनत से एक इतिहास रचा है। पढ़ाई के पूरे साधन ना होने के बावजूद स्वाति ने हर क्लास में अच्छे नंबर लाकर अपने परिवार का नाम रोशन किया है।

मेहनत से सब कुछ हो सकता है संभव

स्वाति ने यह साबित किया है कि परिश्रम और मन में कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी मंजिल पाने की आपकी ख्वाहिश अधूरी नहीं रहती। इन्हीं शब्दों को सच साबित करते हुए स्वाति ने अपनी मेहनत से जो सोचा उसे पाया है। अब वह यूपीएससी की परीक्षा देकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है, ताकि अपने परिवार का नाम रोशन कर सके।

आईआईटी पास करके दिखाया

स्वाति ने अपने दम पर आईआईटी को पास किया है और वह अब यूपीएससी पास करने का मंसूबा पाले हुए है। स्वाति के पिता रामू लगभग 20 वर्ष पहले अपने परिवार के लालन पालन और रोजगार की सोच लेकर आंध्र प्रदेश आ गए थे। आंध्र प्रदेश आकर वह छोटा मोटा काम करने लगे । अपने परिवार को पालने के लिए रामू ने टैक्सी चलानी शुरू कर दी। वह अपनी बेटी और घर की जरूरतों को पूरा करना चाहते थे। स्वाति को भी अपने पिता की आर्थिक स्थिति का पता था, इसलिए वह पूरी मेहनत करती थी, ताकि अपने परिवार का सपना पूरा कर सके।

दसवीं में लिए थे 10/10 नंबर

स्वाति जब दसवीं कक्षा में थी, तब उसने क्लास में टॉप करते हुए दस में से दस नंबर लाकर अपने परिवार को उस पर गर्व करने का मौका दिया था। इसके बाद स्वाति ने आईआईटी की तैयारी शुरू कर दी। आईआईटी पटना में दाखिला लेने वाली स्वाति ऐसी पहली लडक़ी थी, जिसके पिता टैक्सी चलाते थे। इसके बावजूद स्वाति ने अपने अंदर हीन भावना को नहीं आने दिया और अपनी पढ़ाई की और अपनी पढ़ाई में ही ध्यान देकर अव्वल आने की कोशिश में जुटी रही।

स्वाति की मेहनत रंग लाई

स्वाति की यह मेहनत रंग लाई और वह आईआईटी पास कर अपने परिवार का नाम रोशन करने में सफल रही। स्वाति ने आईआईटी पास करने के बाद बताया कि वह अब आईएएस बनने की दिशा में बढऩा चाहती है। उनका कहना था कि यहां तक पहुंचने में उनके पिता और स्कूल के हैडमास्टर सहित सभी शिक्षकों का हाथ है। वह उन सभी का आभार जताती है। स्कूल के हैडमास्टर ने सभी शिक्षकों के साथ मिलकर उसकी आर्थिक मदद भी की, जिसे वह जीवन भर नहीं भुला पाएगा। उसका कहना है कि भविष्य में वह भी जरूरतमंद और गरीब बच्चों की मदद करेगी। ताकि वह भी बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकें।

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