Monday, April 19, 2021
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इस किसान ने असंभव को भी कर दिखाया संभव, विपरित जलवायु के बावजूद खेतों में उगा दी स्ट्रॉबेरी की फसल

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यदि इंसान के मन में कुछ करने का जज्बा और सच्ची लगन हो तो उसके लिए कोई काम मुश्किल नहीं होता। यह साबित कर दिखाया है बिहार के एक किसान बृजलाल मेहता ने। बृजलाल मेहता के पास छोटी से खेतीबाड़ी है, मगर उनके हौंसले बहुत बुलंद हैं। यही वजह है कि इस हिम्मत के दम पर उन्होंने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसे आश्चर्यजनक ही माना जा सकता है। बिहार के एक छोटे से गांव कुटुम्बा प्रखंड के चिल्हकी बिगहा में रहने वाले बृजलाल अपने छोटे से खेतों में सब्जी उगाने का काम कर रहे थे।

representation image pixabay

गांव में हैं मात्र 60 घर

इस गांव में मात्र 60 घर हैं, जहां लोग अपने जीवन यापन के लिए खेती का छोटा मोटा काम करते हैं। अधिकांश गांव में गेंहू, सरसों और दाल की पैदावार की जाती है। इसके अलावा जलवायु के हिसाब से वहां कुछ और उगता भी नहीं है। लेकिन आप यह जानकार हैरान रह जाएंगे कि बृजलाल ने अपने बेटे से मिली जानकारी के आधार पर अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी उगाकर चमत्कार कर दिया।

इस तरह किया संभव

दरअसल बृजलाल का बेटा गुडडू हरियाणा के हिसार में स्ट्रॉबेरी उगाहने वाले किसान के पास काम करता है। उसने ही अपने पिता को इस खेती की जानकारी दी। बेटे से स्ट्रॉबेरी की जानकारी मिलते ही उनके मन में इस फसल को उगाने का विचार आया। बृजलाल ने कृषि विज्ञान केंद्र से इस संदर्भ में जानकारी हासिल की। मगर उन्हें बताया गया कि बिहार की जलवायु के हिसाब से स्ट्रॉबेरी को उगाना असंभव है। मगर बृजलाल तो ठान चुके थे, यह रिस्क हर हाल में लेना है।

इस तरह से पैदा की स्ट्रॉबेरी

पहले पहल बृजलाल ने स्ट्रॉबेरी के कुछ पौधे मंगाए। जब उन्हें लगा कि वे अपने प्रयास में कुछ सफल हो रहे हैं तो फिर उन्होंने पौधों की संख्या 500 कर दी। इसके बाद वह और आसपास के सभी लोग यह देखकर दंग रह गए कि कृषि वैज्ञानिक का अनुमान गलत साबित हो गया। बृजलाल के खेतों में स्ट्रॉबेरी की फसल लहराने लगी। हालांकि यह फसल ठंडे स्थानों पर ही होती है। मगर बृजलाल की हिम्मत और हांैसले ने जब रंग दिखाया और किस्मत ने साथ दिया तो उनके खेतों में भी यह फसल उगने लगी। अब बृजलाल अपने तीन बेटों के साथ पट्टे पर खेत लेकर स्ट्रॉबेरी की फसल उगा रहे हैं।

अन्य प्रदेशों में जाती है स्ट्रॉबेरी

बृजलाल के प्रयासों को देखकर आसपास के किसान भी उनकी तरह से ही स्ट्रॉबेरी उगाने लगे हैं। इससे उनकी आय तो दोगुनी हो ही गई है, बल्कि काफी लोगों को इससे रोजगार भी मिलने लगा है। बिहार से अब यह मीठी स्ट्रॉबेरी अन्य प्रदेशों में भी भेजी जा रही है। इसकी डिमांड भी काफी अधिक होने लगी है। इस तरह से बृजलाल मेहता ने अपने हौंसले के दम पर इस नामुमकिन से काम को मुमकिन कर दिखाया है। इसलिए तो कहा जाता है कि इंसान को अपने जीवन में एक बार रिस्क जरूर लेना चाहिए।

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