Tuesday, April 20, 2021
- Advertisement -

मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती, मजदूर की बेटी पीयू ने गोल्ड जीतकर तोड़े सभी रिकार्ड

Must Read

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...

अलग ही मिट्टी के बने तुषार, 17 साल तक असफलताओं से लड़े, अब बने जज

लोग दो या तीन साल की मेहनत के बाद सफल नहीं होते है तो वह टूट जाते है। लोग...

शहर घूमने सडक़ों पर निकला कोबरा तो रूक गया ट्रैफिक, घटना का वीडियो वायरल

वन्य जीवों के शहर में घूसने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। कभी तेंदुआ तो कभी कोई...
Sanjay Kapoorhttps://citymailnews.com
Sanjay kapoor is a chief editor of citymail media group

मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह साबित कर दिखाया है एक मजदूर की होनहार व संघर्ष करने वाली बेटी ने। जिसने अपनी मेहनत के दम पर खुद का भविष्य लिखा है। आज उसी मजदूर की होनदार बेटी इंटरनेशल स्तर पर ना केवल अपने परिवार का बल्कि अपने देश का नाम भी रोशन कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मैडल जीतकर इस बेटी ने इतिहास रचकर साबित कर दिखाया है कि बेटियां भी बेटों से कम नहीं होती।

fb

गरीबी से लडक़र जीता गोल्ड

हम बात कर रहे हैं एक ऐसी भारतीय धावक की, जिसने अपनी गरीबी से लडक़र यह उपलब्धि हासिल की है। खेतों में नंगे पैर दौडक़र दौडऩे का अभ्यास करते हुए पीयू चित्रा ने इंटरनेशनल स्तर पर भारत का नाम चमका दिया। यही वजह है कि आज खेल जगत में पीयू का नाम सुर्खियों के साथ दर्ज हो गया है। हैरत की बात है कि पीयू का 1500 किमी की दौड़ में आज कोई मुकाबला नहीं कर सकता।

ये है पीयू की कहानी

साल 2019 में दोहा एयियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पीयू ने अपने गले में गोल्ड मैडल पहनकर यह साबित कर दिया कि हौंसले व मेहनत के सामने कुछ भी असंभव नहीं होता। 9 जून साल 1995 में केरल के पलक्कड़ गांव में एक खेती करने वाले मजदूर के घर पीयू का जन्म हुआ था। पीयू अपने भाई बहनों में तीसरे नंबर पर है। हालांकि इस परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी, इसके बावजूद पिता ने अपने बच्चों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पीयू ने अपनी शुरूआती शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कू ल से की। वह पढ़ाई लिखाई में होशियार थी। जिसके चलते उसकी गिनती स्कूल के होनहान बच्चों में की जाती थी।

पीयू को ईनाम में मिली थी नैनो कार

अपने पढ़ाई और स्कूल में बेहतरीन कार्य के लिए पीयू को यूपी विधान परिषद और केरल सरकार दोनों ने ही उन्हें सम्मानित किया था। इस सम्मान स्वरूप पीयू को टाटा नैनो कार दी गई थी। पढऩे के साथ साथ पीयू ने दौडऩे की प्रेक्टिस भी शुरू कर दी थी। हालांकि आर्थिक स्थिति की वजह से पीयू ने नंगे पैर ही दौडऩे का अभ्यास शुरू कर दिया था। देखते ही देखते पीयू ने पढ़ाई के साथ साथ खुद को दौडऩे में भी अव्वल साबित कर दिखाया।

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं

कहते हैं कि प्रतिभा अमीरी-गरीबी की मोहताज नहीं होती। वर्ष 2016 में पीयू ने दक्षिण एशियाई खेलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 1500 मीटर दौड़ में गोल्ड मैडल जीता। साल 2017 में फिर से पीयू ने अपनी दौड़ से स्वर्ण पदक जीतने में सफलता पाई। वर्ष 2018 में भी पीयू ने एशियाई खेलों में कांस्य पदक अपने नाम किया। साल 2019 में तो पीयू ने दोहा में रिकार्ड तोड़ते हुए गोल्ड जीतते हुए देश का परचम लहरा दिया।

मेहनत का परिणाम ये निकला

इस तरह से पीयू ने एक गरीब व मजदूर परिवार में रहते हुए खुद के दम पर एक बड़ा नाम बनकर यह साबित कर दिया कि मेहनत व अथक परिश्रम के बल पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कोई भी बड़ी से बड़ी उपलब्धि को अपने नाम किया जा सकता है। इसलिए कहते हैं कि मेहनत और हौंसले के दम पर लोग अपनी किस्मत खुद ही लिख सकते हैं।

- Advertisement -

Latest News

वैलंटाईन डे मनाने का अनोखा तरीका,मालगाड़ी के नीचे पहुंच गया प्रेमी जोड़ा, फोटो देखकर आएगा मजा

वैलंटाईन डे को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में प्रेमी जोड़े...
- Advertisement -

और भी पढ़े

- Advertisement -