Sunday, April 18, 2021
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जानकर हो जाएंगे हैरान : जंगलों के बीचो बीच रहते हैं यह पति पत्नी, जिंदगी में नहीं हुए कभी बीमार

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लोग आलिशान मकान बनाने में करोड़ों रुपए खर्च कर देेते है। आर्किटेक्ट से तरह तरह के डिजाइन बनवाए जाते हैं। लेकिन उन करोड़ों रुपए की लागत से बने घरों में भी लोग निरोग नहीं रह पाते हैं। वह समय समय पर बीमार हो जाते हैं। जबकि कुछ लोग मिट्टी से भी ऊर्जा हासिल कर लेते हैं। ऐसे ही लोगों में केरल के कन्नूर जिले में रहने वाले हरी और उनकी पत्नी आशा शामिल है। इन दंपत्ति को 17 सालों से कभी भी दवाई खाने की जरूरत नहीं पड़ी। यह दोनों मिट्टी से ही ऊर्जा हासिल कर लेते हैं। दोनों को प्रकृति से काफी लगाव है। जो उनकी जीवनशैली में भी नजर आता है। हरी और आशा को पर्यावरण प्रेम इसी बात से पता चलता है दोनों ने अपनी शादी में पर्यावरण प्रेमियों को ही बुलाया था।

Representation image pixabay

आर्किटेक्ट दोस्त से लिया मिट्टी के घर बनाने का सुझाव

दंपत्ति ने शादी के बाद जब घर बनाने का निर्णय किया तो उनके मन में विचार आया कि घर को कैसे ऊर्जा से भरपूर बनाया जाए। दोनों ने तय किया कि उनका घर प्रकृ ति के काफी करीब होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अपने एक आर्किटेक्ट दोस्त की मदद ली। जिसके बाद उनके सपनों का घर बनकर तैयार हो गया। वह बताते है कि उन्हें यह घर बनाने की प्रेरणा आदिवासी तबके से मिली।

आशियाने में नहीं पड़ी बिजली लगाने की जरूरत

हरी बताते है कि उन्होंने घर में बिजली नहीं लगवाई हुई है। दिन के वक्त में मिट्टी की दीवारे सूर्य की किरणों को घर के भीतर प्रवेश करवाती है। जब तक दिन में सूरज की रोशनी से मिट्टी गर्म होती है तब शाम हो जाती है। वह बताते है कि छत को कंन्क्रीट और नालीदार टाइल से बनवाया गया है। केरल में बरसात अधिक होती है जिसकी वजह से छत को क्रकीट का बनाया गया है। ताकि छत में गलन न हो। इसके अलावा घर में फ्रीज भी नहीं है। वह बताते है कि गार्डन में उगाई हुई सब्जियों को ताजा ही खाते है। उसे ज्यादा दिनों तक रखते नहीं है। हरि और आशा बताते है कि किचन के एक कोन में ईट की जोड़ाई करके एक चौकोर बनाया हुआ है। जिसके भीतर मिट्टी के घड़ा रखा गया है। घड़े के भीतर भोजन अधिक समय तक खराब नहीं होता है। मिट्टी के घर पर सोलर पैनल भी लगवाया गया है। एक आम घर में जहां बिजली की खपत 50 यूनिट से अधिक होती है। वहीं इस घर में बिजली की खपत केवल चार यूनिट है।

तितलियों और चिडिय़ों का बसेरा बन चुका है

आशा बताती है कि जंगल के बीच बनाए गए घर में वह प्रकृति के काफी करीब आ गए है। उनके घर में तितलियों और चिडिय़ों का भी बसेरा बन चुका है। वह अपनी भूमि पर कई तरह के फल और सब्जियां उगाते हैं। वह बीज बोने के लिए खुरपी का प्रयोग करते हैं। आशा कहती है कि जंगल में उगे फल और खेती की जमीन पर उगाए हुए फलो में अंतर होता है। आप मिट्टी से कुछ भी नहीं छिपा सकते। यह अंतर आपको खाने के बाद पता लग जाएगा। हरि कहते है कि पिछले 17 साल से उन्होंने दवा का सेवन नहीं किया है। कभी उन्हें सर्दी जुकाम होता है तो वह गर्म पेय के माध्यम से सही कर लेते हैं।

 

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